हिंदू संहिता-(जारी) खंड 2, (संहिता की प्रयोज्य लागू होना) - जारी - Page 334

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सरकार, भविष्य के विधि मंत्री तथा भविष्य के सदन पर छोड़ दिया जाना चाहिये।

श्रीमती रेणुका रे (पश्चिम बंगाल) : एक व्यक्ति के प्रश्न के सम्बन्ध में श्रीमान्

खंड-2 पर तीन दिन पहले के सत्र में और तीन दिन अब कुल छह दिन तक वाद-विवाद हुआ है खंड-2 पर दिये गये भाषणों में पूरे विधेयक के प्रावधानों पर चर्चा की गयी है। मैं जानना चाहती हूँ कि जब एक बार विचार प्रक्रम समाप्त हो जाये तो क्या सारे विधेयक के ब्योरे पर पुनःविचार हो सकता है, जैसा कि खंड-2 के सम्बन्ध में हुये वाद-विवाद में हुआ है?

श्रीमती दुर्गाबाई : मैं एक स्पष्टीकरण चाहती हूँ। क्या सरकार जैसा कि माननीय विधि मंत्री ने कहा है उत्तराधिकार सम्बन्धी खंडों को एक पृथक् विधेयक के रूप में संसद के आगामी सत्र में प्रस्तुत करने का विचार रखती है? ये खंड क्योंकि ये समता के सिद्धांत पर आधारित हैं, बड़े ही महत्वपूर्ण हैं।

माननीय डॉ. अम्बेडकर : मुझे खेद है कि इस प्रश्न का उत्तर नहीं दे सकता हूँ। यह एक ऐसा विषय है जिसका उत्तर भारत के प्रधानमंत्री ही दे सकते हैं।

श्री देशबन्धु गुप्ता (दिल्ली) : माननीय विधि मंत्री के वक्तव्य को दृष्टि में रखते हुये, मैं जान सकता हूँ कि क्या सरकार इस विधेयक का नाम भी बदलना चाहती है क्योंकि अब यह संहिता नहीं रही है?

माननीय डॉ. अम्बेडकर : जब हम खंड-55 पर पहुचेंगे उस समय मैं कुछ आवश्यक संशोधन प्रस्तुत करूंगा, जिससे यह विधेयक स्वतंत्र हो जायेगा और संहिता से पृथक रहेगा।

श्री जवाहरलाल नेहरू (प्रधानमंत्री तथा वैदेशिक कार्यमंत्री) : यदि मैं माननीय

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सदस्य के प्रश्न का अर्थ समझता हूँ, तो उनका तात्पर्य यह है, कि क्या विधेयक के अन्य भाग इस सत्र में प्रस्तुत होंगे, अथवा दूसरे सत्र में। जहां तक सरकार का सम्बन्ध है, हमने कई बार कहा है, कि हम समस्त विधेयक के समर्थक हैं। हमें समय की तंगी है-इसलिये हमने केवल खंड-2 पर ही विचार करके उसे पारित करने का निर्णय किया है। इसका अर्थ यह नहीं है कि हम विधेयक के अन्य भागों को छोड़ रहे हैं - हम उन्हें पारित कराने में भी बहुत रुचि रखते हैं, परन्तु वास्तव में इसी सत्र में उन्हें पारित कराना बहुत कठिन है। जब हमें भी अवसर मिलेगा, हम दूसरे भागों को भी लेंगे।

माननीय उपाध्यक्ष : जब यह प्रश्न उठा था, माननीय प्रधानमंत्री यहां नहीं थे। श्री मान के भाषण देते समय यह प्रश्न उठा था कि क्या उन्होंने यह कह दिया है