320 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
कि विषय को अभी विवाह तथा विवाह-विच्छेद तक ही सीमित रखा जाये। मैं चाहता था कि अब इस खंड पर वाद-विवाद समाप्त हो जाता क्योंकि इसी में पर्याप्त समय लग गया है। इस विधेयक के शीर्षक में परिवर्तन करने के लिये भी माननीय विधि मंत्री ने कह दिया था। उन्होंने यह भी बताया था कि अन्य भागों के लिये भी संशोधन प्रस्तुत किये जायेंगे जो उस विधेयक के क्षेत्राधिकार तथा विभिन्न सम्प्रदायों पर इसके प्रभाव को प्रकट करेंगे। फिर यह पूछे जाने पर कि यह विधेयक कब प्रस्तुत किया जायेगा उन्होंने कहा था, कि माननीय प्रधानमंत्री ही इस प्रश्न का उत्तर देंगे। क्या यह सारी बातें माननीय प्रधानमंत्री को बता दी गई हैं।
माननीय डॉ. अम्बेडकर : सम्भवतः मैं यह कहना भूल गया था, कि जब खंड-55 हमारे सामने आयेगा तो न केवल उसे स्वतंत्र बनाने के लिये मैं संशोधन रखूँगा, अपितु एक प्रस्ताव भी करूंगा कि विधेयक संशोधित रूप में, अन्य भागों से स्वतंत्र रूप से पारित किया जाये।
दूसरे प्रश्न के बारे में निवेदन है कि मैंने प्रक्रिया नियम देख लिये हैं। हमारे सामने दो विकल्प हैं-एक तो यह है कि उन खंडों को प्रस्तुत किया जाये तथा अस्वीकृत किया जाये, ताकि सरकार तत्पश्चात् एक पृथक संहिता या विधेयक के रूप में प्रस्तुत करने के लिये स्वतंत्र हो जाये। दूसरा मार्ग, श्री मान के विनिर्देश के अधीन-जो कि प्रक्रिया नियमों में है-यह है कि उन भागों को ऐसे ही रहने दिया जाये। संसद् को एक विधेयक में से एक भाग छोड़ देने तथा दूसरे भाग को नये विधेयक के रूप में पारित करने में कोई रूकावट नहीं है। यह सब कुछ मैं श्रीमान तथा सदन की इच्छा पर छोड़ता हूँ। अभी तो हमारा विचार केवल खंड-55 तक जाने का है-उसके साथ कुछ अनुसूचियां भी होंगी। मेरे विचार से अब बात स्पष्ट हो गई हैं।
श्री जवाहरलाल नेहरू : मेरे माननीय सहयोगी ने सारी बात स्पष्ट कर दी है- हमारा विचार वर्तमान समय के लिये केवल खंड-2 को ही पारित करना है-अन्य भागों को हम अभी छोड़ दे रहे हैं। फिर यह कई और सम्भावनाओं पर निर्भर करता है कि विधेयक के अन्य भागों को किस प्रकार लिया जायेगा। परन्तु हां पहले भाग से अलग ही रखा जाना चाहिये।
मैं अपने सत्रावसान सम्बन्धी वक्तव्य में भी संशोधन करना चाहता हूँ। मैंने कहा था कि हम 6 अक्तूबर को कार्य समाप्त कर लेंगे परन्तु चर्चा सम्बन्धी कार्यवाही को देखने से पता लगता है कि उस समय तक हम कार्य को समाप्त नहीं कर सकेंगे। इसलिये इस सत्र के कार्य समाप्त होने तक समवेत रहना पड़ेगा।
श्री देशबन्धु गुप्ता : मैं एक स्पष्टीकरण चाहता हूँ। माननीय विधि मंत्री ने कहा है कि अब यह केवल एक पत्नीत्व विवाह तथा विवाह-विच्छेद सम्बन्धी विषयों वाला