हिंदू संहिता-(जारी) खंड 2, (संहिता की प्रयोज्य लागू होना) - जारी - Page 337

322 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

माननीय उपाध्यक्ष : इसमें कुछ भी असंसदीय नहीं है। माननीय विधि मंत्री अत्यन्त युक्तियुक्त रहे हैं। इस प्रकार अकारण दोषारोपण करने से कोई लाभ नहीं है। इससे यहां जिस सौहार्दपूर्ण वातावरण की अपेक्षा की जाती है उसमें विघ्न आता है। मैं माननीय विधि मंत्री की बात को अच्छी तरह से समझता हूं। वह इस खंड का संशोधन करके, खंड 55 पर आना चाहते हैं। मैंने भी यही सोचा था कि फिर संशोधन करने में हमें कठिनाई होगी। अब मंत्री महोदय ने एक विकल्प बता दिया है कि वह आनुषंगिक संशोधनों के लिये वह प्रारक्षण की व्यवस्था करेंगे। मैं इस खंड पर केवल इस आधार पर कि यह खंड केवल विवाह तथा विवाह-विच्छेद विषयों पर ही लागू होगा वाद-विवाद समाप्त करने के लिये कहूँगा। परन्तु उसे मैं प्रस्तुत नहीं करूँगा मैं समस्त चर्चा को समाप्त कर दूँगा और अध्याय के समाप्त हो जाने पर मैं इसे स्वीकार कर लूँगा। अतः माननीय सदस्यों को चाहिये तो वह आज ही चर्चा को समाप्त कर दें।

सरदार बी. एस. मान : उन्हें दूसरे विषयों का निर्देश नहीं करना चाहिये।

श्रीमती दुर्गाबाई : जैसा कि एक माननीय सदस्य ने कहा है कि राज्य सरकारों ने एक पत्नीत्व सम्बन्धी विधेयक पारित किये हैं, मैं बताना चाहता हूँ, कि केवल बम्बई, मद्रास तथा बड़ौदा राज्यों ने ही ऐसा किया है। बहुत से राज्य ऐसी विधि बना ही नहीं रहे हैं और उच्च न्यायालयों के अनिर्णीत निर्णयों के कारण भी बहुत संभ्रम है। इसलिये एक ऐसी केन्द्रीय विधि आवश्यक है जो सारे राज्यों पर लागू हो। माननीय सदस्यों को चाहिये, कि वाद-विवाद को संक्षिप्त करके विधेयक को

खंड 5 पर पारित कर दें।

माननीय उपाध्यक्ष : अब वाद-विवाद का विषय सीमित हो गया है इसलिये हमें यथाशीघ्र इसे पारित करना चाहिये और कोशिश करनी चाहिये कि दशहरा की छुट्टियों में सत्र की बैठकें न हों।

श्री जवाहरलाल नेहरू : क्या मैं यह सुझाव दे सकता हूँ कि आगामी शनिवार को बैठक समवेत होनी चाहिये?

माननीय उपाध्यक्ष : मैं उस ओर निर्देश नहीं कर रहा था।

श्री जवाहरलाल नेहरू : श्रीमान् मुझे मालूम है मैं तो केवल अगले शनिवार के बारे में सुझाव दे रहा था।

माननीय उपाध्यक्ष : ऐसा तो सदैव हो सकता है। परन्तु हमें शीघ्रातिशीघ्र इस विधेयक को पारित करना चाहिये। और यदि संभव हो सके तो 6 अक्तूबर के पश्चात् नहीं बैठना चाहिये।