हिंदू संहिता-(जारी) खंड 2, (संहिता की प्रयोज्य लागू होना) - जारी - Page 338

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पंडित मालवीय : यदि 6 अक्तूबर के पश्चात् बैठना आवश्यक भी हुआ तो भी हमें दशहरा के दिनों में समवेत नहीं होना चाहिये।

माननीय उपाध्यक्ष : ठीक है। हम सार्वजनिक अवकाश के दिन नहीं बैठेंगे।

सरदार बी. एस. मान : सच पूछा जाये तो मेरी समझ में कुछ नहीं आया।

माननीय उपाध्यक्ष : मैं माननीय सदस्यों को एक सुझाव देता हूँ कि खंड-2 पर चर्चा के समय हमें तत्सम्बन्धी निर्देश ही करने चाहिये। दूसरे विषयों को तभी लिया जायेगा, जब उन पर चर्चा होगी।

श्री सरवटे (मध्य भारत) : यदि हमें इस खंड के अंतिम रूप से पारित होने को स्थागित करना है तो क्या यह ठीक न होगा कि हम इस खंड पर वाद-विवाद किसी और दिन करें?।

माननीय उपाध्यक्ष : हम इस पर पर्याप्त समय लगा चुके हैं। माननीय सदस्यों को समझ लेना चाहिए। जैसा कि माननीय कानून मंत्री, सरकार का दृष्टिकोण स्पष्ट कर चुके हैं कि इस खंड का प्रभाव केवल विवाह तथा विवाह-विच्छेद तक ही सीमित रहेगा। इस आधार पर माननीय सदस्य यह कह सकते हैं, कि यह खंड सिखों, बौद्धों, हिंदूओं अथवा अमुक क्षेत्रों पर लागू नहीं होना चाहिये। किसी अन्य विषय को उठाना ही नहीं होगा।

पंडित मालवीय : क्या मैं माननीय विधि मंत्री को एक सुझाव दूँ? हमें इस खंड पर आज ही चर्चा समाप्त कर लेनी चाहिये तथा इसे सदन के सम्मुख न रखा जाये। चर्चा होने के बाद इसे मतदान के लिये प्रस्तुत किये जाने के स्थान पर हम इसे स्थगित कर सकते हैं। इस खंड पर फिर और वाद-विवाद हो सकता है यह केवल एक रचनात्मक सुझाव है।

माननीय उपाध्यक्ष : मैं आज इस खंड पर वाद-विवाद समाप्त कर दूँगा तथा माननीय विधि मंत्री को उत्तर देने के लिये एक बजे बुलाऊंगा।

श्री श्यामनंदन सहाय (बिहार) : यदि खंड-2 केवल विवाह तथा विवाह-विच्छेद

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से ही सम्बन्ध रखता है, तो अन्य खंडों पर क्या लागू होगा? संहिता के अन्य खंडों के सम्बन्ध में क्या स्थिति है?

माननीय उपाध्यक्ष : अन्य खंडों में भी यथोचित संशोधन किया जायेगा।

श्री श्यामनंदन सहाय : क्या एक ही विधेयक में दो प्रयोज्य खंड होंगे।