326 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
मतदान होगा और चाहे स्वीकृत हो जायें अथवा अस्वीकृत।
श्रीरामलिंगम चेट्टियर : मुझे यही नहीं पता है कि आनुषंगिक संशोधन क्या होता है?
पंडित ठाकुर दास भार्गव : मैं पूछना चाहता हूँ कि क्या केवल विवाह-विच्छेद तथा विवाह के बारे में ही वाद-विवाद करना तथा अन्य तत्सम्बन्धी महत्वपूर्ण विषयों को छोड़ देना ठीक होगा। हम पति-पत्नी के अधिकारों तथा कर्तव्यों को जाने बिना कैसे इस विषय पर चर्चा कर सकते हैं। ऐसी प्रक्रिया विश्व के किसी भी सदन में नहीं अपनाई है। असली विषयों को छोड़ना पड़ेगा।
पंडित मैत्रा : श्रीमान् आप ने अभी कहा है कि केवल आनुषंगिक संशोधनों की ही अनुमति होगी, परन्तु यह कैसे जाना जायेगा कि यह संशोधन आनुषंगिक है अथवा नहीं, क्योंकि तब तक संशोधन सदन में स्वीकृत अथवा अस्वीकृत न हो जायें, हमें परिणाम का पता नहीं चल सकता है। इसलिये इसे स्पष्ट किया जाये। आनुषंगिक संशोधन तो तभी लाया जा सकता है जब पता हो कि इसके स्वीकृत होने की क्या प्रतिक्रिया होगी।
जब तक कोई सदस्य यह नहीं जानेगा कि कोई विशेष संशोधन स्वीकृत होगा या अस्वीकृत तब तक आनुषंगिक बदलाव का सवाल ही पैदा नहीं होगा। जब यह पता चले कि अमुक संशोधन स्वीकृत हो गया या अस्वीकृति हो। तभी आनुषंगिक संशोधन का प्रश्न उठेगा।
श्रीमती रेणुका रे : क्या इस प्रकार का वाद-विवाद फिर कभी नहीं किया जा सकता है। इसमें भी छः दिन लग सकते हैं।
माननीय उपाध्यक्ष : जैसा कि मैंने कहा था, माननीय विधि मंत्री यदि ऐसा कह दें तो अच्छा रहेगा। अभी-अभी कुछ माननीय सदस्य यह जानने के लिये कि इस विच्छेद के प्रभाव से किन जातियों अथवा क्षेत्रों को बाहर रखा गया है, बड़े आतुर हो रहे हैं। यह सब तो विभिन्न संशोधनों का विषय है। यह केवल विवाह तथा विवाह -विच्छेद पर ही लागू नहीं होगा, अपितु अन्य सब बातों पर लागू होगा लेकिन इसमें कुछ अनोखा नहीं है कि जो अन्य चीजों पर लागू नहीं हो सकता, जैसा कि वह विवाह और तलाक पर लागू होता है। माननीय विधि मंत्री ने जैसा कहा है कि वे अन्य विषयों को अभी नहीं लेंगे केवल ‘‘हिंदू संहिता’’ के बारे में वह कह सकते हैं कि यह इस सीमा तक एक संशोधन है....
माननीय डॉ. अम्बेडकर : मैं कहूँगा ‘‘एक अधिनियम’’।