हिंदू संहिता-(जारी) खंड 2, (संहिता की प्रयोज्य लागू होना) - जारी - Page 343

328 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

पता नहीं है बच्चों का उत्तराधिकार इस ओर से मिलेगा अथवा उस ओर से, इससे तो हमें बड़ा नुकसान होगा। हम विवाह करने जा रहे हैं और हमें पता नहीं कि इसके परिणाम क्या होंगे?

श्री श्यामनंदन सहाय : हम इसका विरोध करते हैं।

श्री देशबन्धु गुप्ता : क्या इस आयु में भी माननीय सदस्य को विवाह तथा विवाह-विच्छेद के परिणामों का पता नहीं है।

श्री आर. के. चौधरी : यह अनुचित है। मैं तो रह रहा था....

माननीय उपाध्यक्ष : समस्त गंभीर विषयों को माननीय सदस्य बड़े चातुर्य से विनोदमय कर देते हैं। उन्होंने इस विषय को शान्त कर दिया है। अब सरदार मान बोलेंगे।

* सरदार बी. एस. मान : श्रीमान् मेरे बार-बार बोलने के लिये आप मुझे क्षमा करेंगे क्योंकि मैं एक घनिष्ठ सदस्य हूँ।

माननीय उपाध्यक्ष : माननीय सदस्य अपने भाषण को, संशोधन तक ही सीमित रखेंगे, उन्होंने पहले ही पर्याप्त कह दिया है।

सरदार बी. एस. मान : श्रीमान् कनिष्ठ सदस्य होने के नाते मुझे थोड़ी स्वतंत्रता दी जाये। मुझे सरकार के इरादे में सन्देह है। कुछ निश्चित संशोधनों पर मानसिक और अन्य तरह की आपत्ति व्यक्त की जाती है, की जा चुकी है। संशोधनों के लिये सुरक्षण रखे जाते हैं। माननीय प्रधानमंत्री ने भी कहा है कि वह समय न होने के कारण ही इस विधेयक के अन्य दो भागों को प्रस्तुत नहीं करेंगे। हम जानना चाहते हैं कि क्या वास्तव में इस सत्र में अन्य भागों को नहीं लिया जायेगा। हो सकता है कि यदि सदन 6 अक्तूबर से पूर्व ही खंड-2 को पारित कर दे तो अन्य भाग भी प्रस्तुत कर दिये जायें यह कोई अच्छा तर्क नहीं है।

माननीय उपाध्यक्ष : मैं सारी बात स्पष्ट कर देना चाहता हूँ। मैं माननीय विधि मंत्री के वक्तव्य को जो कि इस विधेयक के प्रस्तावक हैं, मैं प्रमाणित मानता हॅँ तथा उसी के आधार पर कह सकता हूँ कि यह विधेयक केवल विवाह तथा विवाह-विच्छेद तक ही सीमित रहेगा। मैं तो यही समझता हूँ। यदि कुछ गलती है तो उसे ठीक किया जाये।

* संसदीय वाद-विवाद,,खंड- XV भाग- II 9 सितंबर, 1951 पृष्ठ 2861-72