हिंदू संहिता-(जारी) खंड 2, (संहिता की प्रयोज्य लागू होना) - जारी - Page 344

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सरदार बी. एस. मान : मैं भी माननीय प्रधान मंत्री के वक्तव्य को उतना ही महत्व दे रहा था। मैं अपना भाषण संशोधन तक सीमित रखूँगा, और कहूँगा, कि सिख जाति पर इसे लागू न किया जाये।

एक गलत विचार लोगों में फैल गया है, कि सिख पहले हिंदू हैं, और बाद में सिख तथा बहुत समय से हम भी हिंदू विधि के अधीन रहे हैं तथा हिंदू विधि का कभी भी उन पर प्रभाव नहीं हुआ तो क्या इसे सिखों के क्षेत्राधिकार से पृथक कर दिया जायेगा।

इस विषय में मुझे बहुत टोका गया है और बार-बार यह पूछा गया है कि सिखों का कानून मूल कानून से किस प्रकार भिन्न हैं। यह मेरी समस्या है। परन्तु मैं साबित करूंगा कि पंजाब के किसान और अनेक हिंदू तथा मुसलमान समकक्षों का मानसिक ढांचा पूरी तरह भिन्न है तथा वर्तमान विधि सम्बन्धी नियमों से बहुत पृथक् हैं।

श्री भारती : जहां तक विवाह का सम्बन्ध है?

सरदार बी. एस. मान : प्रतीक्षा कीजिये, मैं विवाह सम्बन्धी बात ही कहूँगा।

श्री भारती : यह तो अत्यन्त आवश्यक है।

सरदार बी. एस. मान : मैं सर चार्ल्स रो की पुस्तक ‘‘पंजाब में आदिम जाति विधियां’’ ‘‘ट्रायबल लॉज इन दि पंजाब’’ में से कुछ उद्धरण दूँगा। इसे 1903 की 55 पंजाब रिकार्ड की पूर्ण पीठ के मुख्य न्यायाधीश सर विलियम क्लार्क ने सम्पूर्ण पीठ की बैठक में 55वें पंजाब रिकार्ड उद्घृत किया है। वे कहते हैंः

‘‘पंजाब का हिंदू किसान उसी विधि को मानता है जिसे सिख किसान मानते हैं।’’

महोदय, मैं आपको बताना चाहता हूँ, कि विवाह सम्बन्धी नियम, जो पंजाब में प्रचलित हैं इस विधेयक में रखे गये नियमों से भिन्न हैं, तथा बहुत उदार हैं। वास्तव में मैं इस आश्वासन के बारे में भी नहीं जानता कि सिर्फ 55 खंडों तक चर्चा होती और यह हिंदू संहिता होगी या नहीं या यह कौन-सी संहिता होगी। मैं इस विधेयक पर बोल अवश्य रहा हूँ पर मुझे इसका नाम भी पता नहीं है, मैं केवल यह जानता हूँ कि यह एक नागरिक संहिता अथवा विवाह अधिनियम होगा या अन्य कुछ होगा और ‘‘हिंदू’’ शब्द हटा दिया जाएगा।

वह कहता है : ‘‘पंजाब का हिंदू किसान अपनी जाति के नाम के अलावा इस बारे में कुछ नहीं मानता निस्संदेह ब्राह्मण को शादी तथा शोक के समय बुला कर भोजन कराया जाता है। लेकिन दैनिक कार्यों में उसने हिंदू कानूनों में निर्देशित होने