हिंदू संहिता-(जारी) खंड 2, (संहिता की प्रयोज्य लागू होना) - जारी - Page 350

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पक्ष सहमत हों न कि केवल कुछ संस्कार इत्यादि करने के पश्चात्।

रेवरेंड डीसूजा (मद्रास) : महोदय, मैं जानना चाहता हूँ कि क्या उन विवाहों को मान्यता देने के लिये आवश्यक शर्तें पहले से विद्यमान थीं अथवा केवल एक साथ रहने को ही मान्यता दी गई। चाहे दोनों पक्षों से एक पहले से ही विवाहित क्यों न हों?

सरदार बी. एस. मान : मैं इस विषय पर इसके बाद आऊंगा, अभी मैं विवाहों की पद्धतियों को बता रहा हूँ।

माननीय उपाध्यक्ष महोदय : माननीय सदस्य ने अभी बात को समझा नहीं है। वास्तव में मान्यता के लिये केवल स्त्री-पुरुष का सहवास ही पर्याप्त नहीं है। विवाह को मान्यता देने के लिये सभी चीजें, जैसे कि निषिद्ध पीढि़यां तथा स्त्री का अविवाहित होना आदि देखी जाती हैं। कोई विवाहित स्त्री किसी अन्य पुरुष के साथ रहने लगे तो क्या वो उसका पति हो जायेगा? साथ-साथ रहना ही पर्याप्त नहीं है।

सरदार बी. एस. मान : यदि अन्य शर्तें विद्यमान न हों तो अदालत हस्तक्षेप करेगी। परन्तु यह हिंदू संहिता विधेयक की परिधि में नहीं है।

माननीय उपाध्यक्ष महोदय : यह बात विवाहों की विभिन्न पद्धतियों की है। विवाह चाहे कैसे भी हुआ हो-चादर डालने से हुआ हो या चादर उतारने से, उसकी आज्ञा है। परन्तु क्या माननीय सदस्य यह चाहते हैं कि निषिद्ध पीढि़यों का विवाह भी मान्य हो जाये?

सरदार बी. एस. मान : यदि कोई रिवाज़ बर्बर अश्लील है तो मैं उसका विरोध करूंगा। आप धार्मिक और सिविल विवाह के बारे में ही बातें कर रहे हैं। मैं इनके अलावा और तरह के विवाहों के बारे में आपको बता रहा हूँ। मैं आपको धन्यवाद देता हूँ कि आपने कहा है कि करेवा विवाह पर कोई रोक नहीं होगी। परन्तु इस विधेयक के द्वारा किसी संस्कार पद्धति को तो अवश्य मानना पड़ेगा। दूसरे विवाह के बारे में निवेदन करता हूँ कि यदि एक पत्नी जो पहले पति को छोड़कर दूसरे के साथ पर्याप्त अवधि से जीवन व्यतीत कर रही हो- चाहे वह स्त्री विवाहित भी हो- परन्तु उस के लिये पति से पृथक होना ही पर्याप्त है। यदि कोई स्त्री पृथक् न होते हुये भी दूसरे के साथ रहती है तो साधारण विधि में ऐसा करना दंडनीय है। इसलिये पंजाब में संस्कार रहित विवाहों को भी मान्यता प्रदान की गई है- परन्तु इस विधेयक द्वारा ऐसा करना अवैध हो जायेगा। पंजाब में लोग फुफेरे तथा मौसेरे भाई-बहनों से भी विवाह कर लेते हैं।