340 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
सदन के बाहर के कुछेक लोगों की इस कोड को अधिनियमित कराने की आकांक्षा और उत्सुकता को मैं जानता था और हम लोगों में से कई लोग भी जानते थे; परन्तु पता नहीं क्यों; हमने महसूस किया था कि देश भर में इस बारे में जागृत प्रबल जनमत को नजरअंदाज नहीं किया जाएगा और जब ऐसा विचार किया जा रहा था तब महसूस हुआ था कि कानून की किताबों में इतने अव्यवस्थित तरीके से, जैसा अब किया जा रहा है, ऐसा कोई विधेयक शामिल करने का कोई गंभीर प्रयास नहीं किया जाएगा, जो इस देश के लोगों के समाजिक आधार और समाज के ताने-बाने को प्रभावित करता हो। इसके विविध आयामों पर इस देश के लोग आंदोलन कर रहे हैं और कई ऐसे लोग जो इस प्रकार का कोई कानून बनाए जाने की संभावना से क्षुब्ध हैं वे इसके विरुद्ध व्याप्त व्यापक आक्रोष और असंतोष की ओर सरकार का ध्यान आकृष्ट करने के लिए जो भी संभव है वह उपाय कर रहे हैं। लेकिन इस आशा और आस्था के साथ कि ऐसी कोई बात जो सिद्धांततः गलत हो, इतनी नृशंस और सामयिक दृष्टि से इतनी बेमतलब की हो, इस सदन के सामने कभी नहीं आएगी; मैं स्वयं कभी किसी सार्वजनिक मंच पर एक बार भी खड़ा नहीं हुआ हूँ और न ही ऐसे किसी आन्दोलन में मैंने भाग लिया है। लेकिन व्यक्ति अपने जीवन में आगे बढ़ता और सीखता है और अब इस बात से मेरा सामना हुआ है कि 300 मिलियन लोगों के जीवन को प्रभावित करने वाले एक विवादास्पद उपाय पर इस सदन में, जो अपनी यात्रा के अंतिम चरण में है, विचार किया जाएगा और इतना प्रबल विरोध होने के बावजूद इसे पारित कराने और कानून की किताबों में इसे शामिल कराने का प्रयास किया जाएगा। मैं यह नहीं कहता कि इस विधेयक के सिद्धांत का इस देश में कोई भी व्यक्ति समर्थन नहीं करता है (पंडित मैत्रा : केवल कुछेक लोग)। मैं यह नहीं कहना चाहता हूँ कि ऐसे कोई लोग नहीं हैं जिनका ईमानदारी से यह अभिमत है कि ऐसा कानून पारित करना समाज के हित में नहीं है। मेरा ऐसे लोगों से कोई विरोध नहीं है। मैं हिन्दू हूँं और बौद्धिक या वैचारिक - किसी भी प्रकार की असहिष्णुता मेरे भीतर नहीं है। इसलिए, यदि इस देश के लोग महसूस करते हैं कि इस प्रकार का कोई उपाय या इससे भी अधिक क्रांतिकारी कोई उपाय समाज पर लागू किया जाना चाहिए तो चाहे मैं उनसे सहमत नहीं हूँ या उनकी राय को मैं दुर्भाग्यपूर्ण कहूँ परन्तु मैं उनसे विवाद कदापि नहीं कर सकता हूँ। अतः मैं यह वैचारिक स्थिति नहीं बनाऊंगा कि इस देश में ऐसा कोई नहीं है जो यह विधेयक चाहता हो। लेकिन यह बात जाहिर है कि कुछ लोग हैं जो इस बात को समझना ही नहीं चाहते हैं कि अब तक की स्थिति में अधिकांश लोग न केवल इस विधेयक के पक्ष में नहीं हैं ........