हिंदू संहिता-(जारी) खंड 2, (संहिता की प्रयोज्य लागू होना) - जारी - Page 356

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कुछ माननीय सदस्य : प्रश्न।

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पंडित मालवीय : ........बल्कि इसके कारण बहुत क्षुब्ध हैं। वे लोग बहुत व्यथित हैं और नहीं जानते कि ऐसा कोई कानून पारित किए जाने के खतरे की स्थिति में उन्हें क्या करना चाहिए (व्यवधान)। मेरे कुछ मित्र दब्बू बनकर और तोते की तरह, शायद आदत से मजबूर होकर ’प्रश्न’, ’प्रश्न’ चिल्ला रहे हैं। मैं उन्हें सदाशयतापूर्वक चुनौती देता हूँ कि वे देश में कहीं भी मेरे बयान पर सवाल उठाएं। मैंने इस संसद के कांग्रेस पार्टी के सदस्यों की एक बैठक में यह मत व्यक्त किया था कि सार्वभौमिक महत्व के इस मामले में चाहे इस प्रकार से कोई कानून बनाना कानूनी तौर पर गलत न हो किन्तु यह सर्वथा अन्यायपूर्ण होगा, यदि हम इससे प्रभावित होने वाले लोगों को इस मुद्दे पर अपने विचार व्यक्त करने का पर्याप्त अवसर दिए बिना संसद में यह मामला उठाएं। मैंने कहा है कि इस प्रकार के मामले पर हम कम से कम इतनी उम्मीद तो कर सकते हैं कि यह मुद्दा आम चुनाव में मतदाताओं के सामने रखा जाए या इस मामले पर जनमत संग्रह कराने की इजाजत दी जाए।

श्री भारती : एक पत्नीत्व पर?

पंडित मालवीय : चाहे सही हो गलत, प्रासंगिक हो या अप्रासंगिक, मेरे सम्मानीय मित्र श्री भारती के पास हर मौके पर खेलने के लिए वही पुराना पŸा होता है। मैं समय आने पर इस पŸो की बात करूंगा और दिखा दूँगा कि इसकी कीमत कितनी है। लेकिन “एक पत्नीत्व” शब्द का व्यवधान उत्पन्न करके मेरी इस बात को दरकिनार नहीं किया जा सकता है कि इस मामले में हमारे लिए सही रास्ता यही होगा कि इस मुद्दे पर लोगों को अपना विचार व्यक्त करने का मौका देने के लिए एक जनमत संग्रह कराएं और यदि हम पाते हैं कि थोड़ी-बहुत संख्या या अल्पसंख्या में भी ऐसे लोग हैं मेरी चुनौती किसी सन्देह या भय पर आधारित नहीं है - और मैं यही कहता हूँ कि जनमत संग्रह के परिणामस्वरूप यदि पर्याप्त अल्पसंख्या में भी लोग इस उपाय के पक्ष में हैं, तो क्यों न हम मिल-बैठकर गंभीरता से इस कानून को तैयार करने में लग जाएं। यदि यह संभव नहीं है तो मेरे वक्तव्य पर सवाल

खड़े करने वाले मेरे सम्मानीय मित्रों से मैं कहना चाहूँगा कि वे इस सरकार और विधि मंत्री से अनुनय करें कि आधा दर्जन लोग अपने पद से त्यागपत्र दे दें - मैं भी उन लोगों में शामिल होने के लिए तैयार हूँ : और इस कोड के मुद्दे को लेकर चार सप्ताह के भीतर उप चुनाव करवा लें....

श्री भारती : एक पत्नीत्व पर ?

पंडित मालवीय : ........ और उन छह में यदि कुछ निर्वाचन-क्षेत्रों में भी उपचुनावों