344 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
और दूसरे सदस्यों के बीच भेद कर रहे हैं।
पंडित मालवीय : विद्वत्ता पर मेरा कोई दावा नहीं है। मैं नहीं समझता कि किसी
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भी माननीय सदस्य को भयभीत होने की जरूरत है।
उपाध्यक्ष महोदय : मैं आशा करता हँ कि यह बहस आज ही सम्पन्न हो जाएगी।
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कृपया और व्यवधान उत्पन्न न करें।
पंडित मालवीय : मार्गदर्शन के लिए मैं आपका आभारी हूँ। मेरा निवेदन यही
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है कि इस विधेयक में एक खण्ड हो सकता है जो हिन्दुओं की सामाजिक संरचना से संबंधित हो अथवा सामाजिक संरचना से जुड़े सैकड़ों खण्ड हो सकते हैं। किन्तु यदि यह हिन्दुओं की सामाजिक संरचना को प्रभावित करने जा रहा है तो कोई भी इस मामले में तब तक आगे नहीं बढ़ सकता जब तक वह सामाजिक संरचना और वह खण्ड उसे किस प्रकार प्रभावित करेगा, इस पर चर्चा न कर ले। सामाजिक संरचना पर टुकड़ों-टुकड़ों में अलग से बहस नहीं की जा सकती। यह व्यावहारिक नहीं है। अब तक जो चर्चा हुई है उसके बाद मैं यह महसूस करता हूँ कि किसी विशेष मामले पर असंतुलित दृष्टिकोण रखना और सामान्य पहलू को नजरअंदाज कर देना हमारे लिए संभव और सही नहीं होगा। किन्तु महोदय, मैं आपको आश्वस्त करना चाहता हूँ कि मैं इस विमर्श के दौरान आपके मार्गदर्शन के अधीन रहूँगा और किसी भी समय यदि आप समझते हैं कि मुझे कोई बात आगे नहीं बढ़ानी चाहिए तो मैं तुरंत आपकी आज्ञा का पालन करूँगा।
यह कहा गया है कि यह विधेयक अब विवाह और विवाह-विच्छेद इन दो बातों पर ही सीमित रहेगा। आज हिन्दू समाज जो कुछ है, विवाह इसकी समस्त संरचना की आधारशिला है। हिन्दू समाज में ऐसा कुछ भी नहीं है जिसे हिन्दुओं की विवाह प्रणाली से असम्बद्ध किया जा सके। इसलिए पूरे हिन्दू समाज के सामान्य पहलू का उल्लेख किए बिना इस समाज की विवाह संस्था पर चर्चा करना संभव नहीं है। मैं जो कुछ भी कह रहा था, वह विवाह और विवाह-विच्छेद पर भी प्रत्यक्ष रूप से लागू होता है। मैं यह कह रहा था कि अन्य लोगों की तरह समाज के पुरातनपंथी वर्ग के लोग भी इस उपाय के विरुद्ध हैं, जिनके बारे में इस सदन के कुछ माननीय सदस्यों ने कल और उससे पहले कहा था कि वे जनसंख्या का लगभग अस्सी प्रतिशत हैं, जिनके बारे में कहा गया था कि इस विधेयक में जो प्रावधान किए गए हैं वे आज भी मौजूद हैं। अगर ऐसा है तो भी सन्देह है। जिन लोगों को आज विवाह-विच्छेद और आसान विवाह की सुविधा उपलब्ध है, उनमें से अधिकांश लोगों के लिए इस विधेयक के प्रावधान जमीन-आसमान का अन्तर उत्पन्न कर देंगे। इन प्रस्तावों के