हिंदू संहिता-(जारी) खंड 2, (संहिता की प्रयोज्य लागू होना) - जारी - Page 361

346 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

बहुत बड़ा हिस्सा है। उन्हीं के लिए सरलता और आसान उपलब्धता के उद्देश्य से आज के विवाह और विवाह-विच्छेद कानून निर्धारित किए गए हैं। आज एक पुरूष या आज एक स्त्री वैवाहिक संबंध को समाप्त कर सकती है और पलक झपकते ही और दूसरा शुरू कर सकती है। इस विधेयक के प्रावधानों के अन्तर्गत ऐसा करने के लिए उन्हें महीनों इंतजार करना पड़ेगा, उन्हें न्यायालय जाना पड़ेगा और एक पूरी प्रक्रिया से गुजरना पड़ेगा। इस मामले के गुण-दोषों पर मैं अपनी कोई राय नहीं दे रहा हँ। मुझे व्यक्तिगत तौर पर खुश होना चाहिए और इस सुधार पर विचार करने के लिए विधि मंत्री जी को बधाई देनी चाहिए, लेकिन मैं व्यवहारिक प्रभावों की बात कर रहा हूँ। व्यावहारिक प्रभाव यह होगा कि गांव-गांव में हत्याएं होने लगेंगी।

डॉ अम्बेडकर : हमारे पास पर्याप्त पुलिस बल है।

पंडित मालवीय : उस व्यक्ति के लिए जो अब भी कमोबेश पशु अवस्था में है .... श्रीमती रेणुका राय : प्रश्न।

पंडित मालवीय : मैं किसी का अपमान करने की भावना से यह सब नहीं कह रहा हूँ। मैं तो केवल एक समाजशास्त्री होने के नाते ऐसा कह रहा हूँ। यदि वे पुरूष अपने रास्ते में नई रुकावटें देखते हैं, जिनके वे आदी नहीं हैं, जिनकी उन्हें आदत नहीं है और यदि वे अपने आपको नाकामयाब पाते हैं, यदि उनमें इतना संयम नहीं है उनमें इतनी प्रगति और नियंत्रण नहीं है कि वे कानून बनने तक इंतजार करें, और समाज को, जिसके अस्सी प्रतिशत के बारे में इतना कुछ कहा जा चुका है, ऐसी उथल-पुथल का सामना करना पड़ेगा जिसकी आज कल्पना भी नहीं की जाती है। इसीलिए मैंने कहा कि इस विधेयक का स्वागत वे लोग नहीं करेंगे जो मेरी तरह चाहते हैं कि युगों-युगों से चली आ रही परम्पराओं का ससम्मान किया जाए और उनका अनुसरण किया जाए, बल्कि इसका स्वागत वे लोग भी नहीं करेंगे, जो इससे बड़े पैमाने पर और तुरन्त प्रभावित होने जा रहे हैं। अतः मैं ससम्मान निवेदन करना चाहता हूँ कि इस सदन के कुछ सदस्यों में भी, जो इस विधेयक के प्रावधानों के बारे में इतने मुखर और उत्साहित रहे हैं, उक्त लोगों की तुलना में शायद ही कोई अन्तर है।

डॉ अम्बेडकर : मैं भी नहीं।

पंडित मालवीय : माननीय विधि मंत्री तो कदापि नहीं ! माननीय विधि मंत्री जी की तुलना मनु जैसे ऋषि से की जाती है और मुझे एक श्लोक स्मरण हो आता है