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कोई संदेह हो और यदि किसी सदस्य के पास कोई सुझाव हो तो मैं यह महसूस करता हूँ कि संसदीय प्रणाली का उद्देश्य, उसका सिद्धांत ही निष्फल हो जाएगा यदि किसी सदस्य को अपना संदेह दूर करने और प्रश्न पूछने का अवसर नहीं दिया जाता और यदि कोई पूछे गए प्रश्न का अपनी सर्वात्तम योग्यता के अनुसार उत्तर नहीं देता है। इसलिए टोकाटाकी पर मुझे कोई आपत्ति नहीं है।
श्री राधेलाल व्यास : क्या मैं माननीय सदस्य से इस बात पर प्रकाश डालने का अनुरोध कर सकता हूँ कि एकविवाह और विवाह-विच्छेद कानून, जो मद्रास और बम्बई में लागू है उसने हिन्दू समाज को किस प्रकार प्रभावित किया है ?
अध्यक्ष महोदय : मैं माननीय सदस्य से अनुरोध करूंगा कि अपनी बात का सूत्र न छोड़ें और टोकाटाकी से गुमराह न हों।
पंडित मालवीय : महोदय, मैं आपका आभारी हूँ और आपको आश्वस्त करता हूँ कि गुमराह होने का कोई डर मुझे नहीं है। मैं निवेदन कर रहा था कि इन सभी राज्यों में लोगों को यह जानने का कोई भी अवसर प्राप्त नहीं था कि यह विधेयक है क्या। मेरे लिए यह संभव है कि इस मुद्दे पर मैं विस्तार से बोलूँ, विधायन के बहुश्रुत और सार्वभौमिक सिद्धांतों और विधियों का विवेचन करूं और ऐसी स्थिति के गंभीर अनौचित्य की ओर ध्यान आकृष्ट करूं। लेकिन मेरा विश्वास है कि यह सब करने के बजाए मुझे इस ओर मात्र ध्यान दिलाना चाहिए और आशा करनी चाहिए कि सरकार यह देखे कि इस मामले में कितना घोर अन्याय होने जा रहा है। यदि हो सके तो वह अन्याय को पूरी तरह से नहीं तो यथासंभव सीमा तक उसका निवारण करें। अब यह संभव नहीं है कि इस विधेयक को उन लोगों की सूचनार्थ परिचालित और प्रकाशित किया जाए क्योंकि सरकार ने घोषित कर दिया है कि यह विधेयक तुरंत पारित किया जाना है अतः उस प्रक्रिया का सुझाव देने में मैं समय बरबाद नहीं करूंगा।
मेरा सौभाग्य है कि मेरे पास मेरी एक बहन बैठी हैं जो मेरे कान में कुछ न कुछ फुसफुसाकर मेरी सहायता करती रही हैं।
श्रीमती रेणुका रे : मैं उनसे कह रही थी कि इस विधेयक में प्रस्तावित सुधार लाने के पक्ष में दिया गया यह सबसे अच्छा भाषण है।
श्री मुनावल्ली : इस मामले में मैं अपने मित्र को बताना चाहता हूँ कि........
सरदार बी. एस. मान : यह समय माननीय सदस्य द्वारा इस सदन को कुछ बताने का है, जो पहले से ही बोलने के लिए खड़े हैं।