हिंदू संहिता-(जारी) खंड 2, (संहिता की प्रयोज्य लागू होना) - जारी - Page 373

358 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

पंडित मैत्रा : माननीय सदस्य ने एक बड़ा ही महत्वपूर्ण मुद्दा उठाया है कि यह विधेयक राज्यों में प्रकाशित नहीं किया गया था........

अध्यक्ष महोदय : मैं नहीं जानता कि माननीय सदस्य इस बात की वकालत क्यों करना चाहते हैं।

पंडित मालवीय : इस बात को देखते हुए कि यह विधेयक राज्यों में प्रकाशित नहीं किया गया है और संभवतः उन पर अब लागू होने जा रहा है, इस घोर अन्याय का निवारण करने के लिए कुछ किया जाना चाहिए। इसे कैसे किया जा सकता है, शायद इसकी समुचित सलाह विधि मंत्री जी दे सकते हैं। जैसा कि मैंने कहा इस समय कोई अव्यावहारिक सैद्धांतिक सुझाव देने का कोई उपयोग नहीं है। इसलिए अब मैं यह नहीं कहता कि यह विधेयक सूचनार्थ परिचालित या प्रकाशित किया जाना चाहिए। लेकिन, शायद हम कोई रास्ता ढूँढ सकते हैं जिससे कम से कम कुछ सीमा तक यह कठिनाई दूर हो। और मैं विधि मंत्री जी के विचारार्थ एक सुझाव दूँगा - एक ऐसे व्यक्ति के रूप में नहीं जो इस विधेयक के विरोध में है, बल्कि ऐसे व्यक्ति के रूप में जिसे मेरे विचार से इस मुद्दे पर अपने साथ खड़ा पाएंगे कि इस देश के एक विशाल भाग के लोगों को किसी प्रकार की स्पष्ट और कानूनी शिकायत नहीं होनी चाहिए। मैं उन्हें सुझाव देना चाहूँगा कि वे शेष राज्यों के लिए न सही, कम से कम उन राज्यों के संबंध में ही इस प्रस्ताव पर विचार करें। जिस संशोधन की सूचना मैंने दी है और जिसे मैंने प्रस्तुत किया है उसमें कहा गया है कि यह विधेयक उस पर लागू किया जाना चाहिए जिसके राज्य में जनमत संग्रह कराया गया है और उस जनमत संग्रह के परिणाम के अनुसार उस राज्य की विधानसभा ने निर्णय लिया हो कि यह विधेयक उन पर लागू होना चाहिए। मैं उस पर यथासमय बात करूंगा। लेकिन अब मेरा सुझाव यह है कि - चाहे मेरा संशोधन पूर्णतः स्वीकार किया जाए अथवा न किया जाए, विधि मंत्री जी विधेयक में यह प्रावधान करने के औचित्य पर विचार करेंगे कि देश के उन भागों के संबंध में जिन्हें तब भारतीय राज्य कहा जाता था, जहां यह विधेयक प्रकाशित नहीं किया गया था, यह विधेयक प्रवृत्त नहीं होना चाहिए जब तक कि विधिवत प्रकाशन और परिचालन के बाद उन भागों के विधान मण्डलों में इस पर विचार न कर लिया जाए और विधानमंडलों ने निर्णय लिया हो कि यह उन पर लागू होना चाहिए। इससे कम से कम उस गंभीर चूक, गंभीर गलती का निवारण हो जाएगा। जो आज हमारे सम्मुख है।

श्री मती रेणुका रे : और हम आने वाले हजार वर्षां के लिए ब्राह्मणवादी समाज की नादिरशाही को बनाए रखे रहे।