360 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
श्रीमती रेणुका रे : याद रहे।
पंडित मालवीय : निःसंदेह मुझे याद है, अन्यथा मैं इसे कहता कैसे। लेकिन श्रीमती रेणुका राय को इसे जानने और याद रखने की जरूरत है।
श्रीमती रेणुका रे : आप हिन्दू समाज की बात इसकी अधोगति के दिनों में कर रहे हैं। कृपया वेदों और उपनिषदों को याद कीजिए।
अध्यक्ष महोदय : मैं माननीय सदस्य से अनुरोध करता हूँ कि वे पहले की तरह अपनी बात को लेकर आगे बढें़ और इस टोकाटाकी का उत्तर न दें। अन्यथा इस विषय का मुख्य सूत्र ही गुम हो जाएगा। मैं माननीय सदस्यों से अनुरोध करूंगा कि वे वक्ता को न टोकें।
श्रीमती दुर्गाबाई : महोदय, क्या मैं कुछ कह सकती हँ ? क्या इस विधेयक का आशय सभी पुरूषों के सामने राम का उदाहरण प्रस्तुत करना नहीं है ? क्या अब वह विषय वस्तु नहीं बन गया है ?
अध्यक्ष महोदय : यह तो स्पष्ट रूप से टोकाटाकी हुई।
सरदार बी. एस. मान : आजकल माननीय महिला सदस्यों की टोकाटाकी को नजरअंदाज करना बहुत खतरनाक है।
श्रीमती दुर्गाबाई : टोकाटाकी के मामले में महिला सदस्यों और दूसरे सदस्यों के बीच कोई भेद नहीं है।
पंडित मालवीय : ब्राह्मण समाज में स्त्री को उच्चतम स्थान दिया गया है। मां से बढ़कर और कोई नहीं है।
डॉ. एम. एम. दास : एक पुरूष की 250 पत्नियां - क्या स्त्री की यही गरिमा है ?
अध्यक्ष महोदय : ऑर्डर, आर्डर। कृपया माननीय सदस्य को बोलने दीजिए।
पंडित मैत्रा : किस पुरूष ने 250 स्त्रियों से विवाह किया ?
डॉ. एम .एम. दास : मैं कह रहा था कि ........
अध्यक्ष महोदय : ऑर्डर ऑर्डर। आपस में विवाद न करें। हमें सदन की गरिमा बनाए रखनी चाहिए।
पंडित मालवीय : मैं अपनी बात फिर शुरू करता हँ, मैं निवेदन कर रहा था कि यदि और कुछ नहीं किया जा सकता हो तो हम कम से कम यह उपाय उन क्षेत्रों