362 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
पंडित मालवीय : मैं जो निवेदन कर रहा था वह सम्पत्ति के संबंध में किए गए
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प्रावधानों के स्वरूप के बारे में नहीं था। मैं निवेदन कर रहा था और आपके वापस आने से पहले जो दूसरी बात मैं स्पष्ट करने का प्रयास कर रहा था वह कुछ अत्यंत आपत्तिजनक विशेषताओं और परिस्थितियों से संबंधित है जिसमें यह विधेयक इस सदन के समक्ष प्रस्तुत किया जा रहा है और इसीलिए मैं उल्लेख कर रहा था कि जब यह विधेयक पहली बार तैयार किया गया था, तब से परिस्थितियों में एक गंभीर और आधारभूत बदलाव आ गया है। इस देश के 90 प्रतिशत भाग पर इसकी प्रयोज्यता नहीं थी। परन्तु अब होगी, क्योंकि संविधान में एक समवर्ती सूची रख दिए जाने के कारण, जिसमें कृषि भूमि और सम्पत्ति शामिल की गई है ........
उपाध्यक्ष महोदय : विधेयक पर अभी उतना विचार नहीं किया गया है। यह
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अभी विवाह और विवाह-विच्छेद से संबंधित भाग तक ही सीमित है। दूसरा विधेयक आने पर माननीय सदस्य के पास विचार करने के लिए पर्याप्त समय होगा कि यह कृषि भूमि को कैसे प्रभावित करेगा। आज हम उस मामले पर बात न करें। कृषि भूमि को समवर्ती सूची में रखे जाने से चाहे कुछ भी परिर्वतन आता हो, हमें अभी उससे कोई सरोकार नहीं है।
पंडित मालवीय : महोदय, आपके विनिर्णय और निर्णय का मैं पालन करूंगा।
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लेकिन मुझे जो कुछ कहना है वह मैं आपके विचारार्थ निवेदन करूंगा और आपके निर्देशानुसार कार्य करूंगा। जब कभी भी कृषि सम्पत्ति से संबंधित बिल प्रस्तुत किया जाएगा, तब निःसंदेह हमारे पास उस विधेयक के खण्डों पर विस्तार से विचार करने और अपना अभिमत व्यक्त करने के लिए हमारे पास समय होगा। परन्तु महोदय, जैसा कि आपने कहा, मैं इस देश में भू-सम्पत्ति के प्रश्न पर या उसके निपटान की विधि पर अपना कोई अभिमत देने का प्रयास नहीं कर रहा हूँ। उस विषय पर मैं बोल ही नहीं रहा हूँ। लेकिन जो बात मैं सामने लाना चाहता हँ वह इस विधेयक के दायरे के बारे में है। इसके प्रावधान चाहे जो भी हां, चाहे विवाह हो चाहे मृत्यु हो अथवा चाहे कुछ भी हो, किसी न किसी रूप में यह सब पर लागू होगा। मैं यह दिखाने का प्रयास कर रहा हूँ कि इसके प्रावधान किस-किस के साथ जुडें़गे। उदाहरण के लिए, आपके आसन ग्रहण करने से ठीक पहले मैं कह रहा था कि उन राज्यों को सीधे इस विधेयक के अन्तर्गत नहीं लाना चाहिए, जिनमें यह विधेयक प्रकाशित नहीं किया किया गया है, और कम से कम एक प्रावधान होना चाहिए कि संबंधित राज्यों द्वारा इसे प्रकाशित किए जाने के बाद ही संबंधित विधानमंडलों से इस पर निर्णय लेने का अनुरोध किया जाना चाहिए। इसी प्रकार मैं निवेदन करना चाहता हूँ कि मैं जो उल्लेख कर रहा था वह असल किसी भू-सम्पत्ति और किसी अन्य