हिंदू संहिता-(जारी) खंड 2, (संहिता की प्रयोज्य लागू होना) - जारी - Page 379

364 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

उपाध्यक्ष महोदय : माननीय सदस्य और कितना समय लेना चाहते हैं?

डॉ. अम्बेडकर : पाँच दिन।

पंडित मालवीय : विधि मंत्री जी कहते हैं पांच दिन - मुझे पांच दिन में कोई आपत्ति नहीं है।

श्री सोंधी (पंजाब) : चुनौती स्वीकार है।

श्रीमती दुर्गाबाई : सदस्य बंधु को मेरा सुझाव है कि उनकी थीसिस छपवाई और बांटी जाएगी और समझा जाएगा कि वह पढ़ ली गई है। माननीय सदस्यगण : नहीं, नहीं।

पंडित मालवीय : जब मेरी माननीय बहन इस देश का संविधान बनाती हैं और संसद के नियम भी बनाती हैं तब शायद हम यह प्रक्रिया भी अपना लेंगे।

सरदार बी. एस. मान : वह दिन भी दूर नहीं है।

पंडित मालवीय : मैं अनावश्यक समय नहीं लूँगा, लेकिन मैं अपनी बात आज समाप्त नहीं कर पाऊंगा।

उपाध्यक्ष महोदय : मुझे बताएं कि अब से लेकर कितना समय लेंगे।

डॉ. अम्बेडकर : पांच दिन न सही, पांच घंटे।

पंडित मालवीय : मुझे बहुत कुछ कहना है, वह सब मैं आपके मार्गदर्शन में कहूँगा। यदि मुझे इजाजत दें तो यह मामला आपके सामने खुला रखूँगा। मैं आपके पास आने और अपनी सामग्री आपको दिखाने के लिए तैयार हूँ और आप इस सदन के सभी सदस्यों के विशेषाधिकारों के अभिरक्षक होने के नाते यह बात आप पर छोड़ता हूँ कि मुझे बताएं कि मुझे कितना समय लेना चाहिए।

उपाध्यक्ष महोदय : किसी मुद्दे पर चल रही बहस पर अंकुश लगाने या उसे घटाने का मेरा कोई मंतव्य नहीं है। माननीय सदस्य ने दो घंटे पहले ही ले लिए हैं और छह दिनों तक हम बहस भी कर चुके हैं। जहाँ तक पुस्तकों और सन्दर्भ साहित्य का संबंध है, उल्लेख माननीय सदस्य ने किया था, वह सब विस्तृत विचार-विमर्श के लिए है और वह अवसर अपने हाथ से जाने नहीं देंगे। दूसरे और खण्ड भी हैं जिन पर वे अपना ज्ञान कोश हमसे साझा कर सकते हैं। जहां तक इस अवसर का संबंध है आधा घंटा और माननीय सदस्य के लिए पर्याप्त होना चाहिए।

पंडित मालवीय : मेरा विचार है कि यह पर्याप्त नहीं होगा। यदि आप इजाजत