खंड 2 : (संहिता का प्रयोग) - Page 38

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मेरे पक्ष में संविधान में एक और भी परन्तुक है, और वह है अनुच्छेद 44 जिसमें कहा गया है :

‘‘राज्य का प्रयास भारत के पूरे भू-भाग में सभी नागरिकों के लिए एक-समान नागरिक संहिता सुनिश्चित करना होगा।’’

एक नागरिक संहिता का वास्तव अर्थ है; एक सहिता जिसमें विवाह, उत्तराधिकार, गोद लेना आदि सम्मलित हो।

नागरिक संहिता का क्षेत्र वही है जो हिंदू संहिता विधेयक का है। संविधान के अनुच्छेद में कहा गया है कि ‘‘राज्य का प्रयत्न होगा।’’ जिसका इस विधेयक में संशोधन किया जा रहा है। इसलिए यह ही सही है कि प्रथम अवसर संविधान के इस परन्तुक को प्रस्तुत करने के लिए दिया जाए और इस संशोधन को मानने के लिए डॉ. अम्बेडकर पहले व्यक्ति होने चाहिए।

क्योंकि इस संहिता पर पिछले सत्र से ही चर्चा हो रही है, मेरे कुछ मुसलमान मित्र और मेरे कुछ पारसी मित्रों ने भी अपना पूरा संतोष व्यक्त किया है और वे उस संहिता के परन्तुकों की बड़े जोर से प्रसन्नतापूर्वक प्रशंसा कर रहे थे। मैं उनका स्वागत करता हूँ और उनसे प्रार्थना करता हूँ कि मेरी सहायता करें। जब वे सोचते हैं कि परन्तुक बहुत सही और उचित हैं तो उन्हें अपनी मान्यताएँ ऐसे ही भाषणों, जैसा कि मैं अभी दे रहा हूँ दें अर्थात् संहिता सभी पर लागू होनी चाहिए।

मेरा कहना है कि ‘‘हिंदू’’ शब्द इस संहिता में, जब तक कि कोई और कारण न हो भारत के नागरिकों से है। मैंने स्पष्ट रूप से कहा है, जब तक कि इसके लिए कुछ और न दिया गया हो अर्थात् अगर इस कानून के कुछ परन्तुक कुछ धर्म के लोगों पर लागू नहीं होते हैं, उदाहरणार्थ अगर वे सोचते हैं उनके लिए यह मानना आवश्यक नहीं है, तो वे इस उद्देश्य से कह सकते हैं कि वे ‘‘हिदू’’ शब्द में; उदाहरणार्थ एक मुसलमान और एक ईसाई को इसमें सम्मिलित नहीं किया जाना चाहिए। वाक्यांश ‘‘जब तक कुछ और न दिया हो’’ स्पष्ट करेगा कि यह प्रयत्न लचकदार है। मेरी परिभाषा हर एक धर्म के लिए संहिता को, अपने विश्वासों या जैसा भी माननीय सदस्य अपने-अपने धर्म के अनुसार करने के लिए सोचते हों, अपनाने को काफी गुंजाइश होगी। इसलिए इसमें किसी प्रकार की परेशानी नहीं होनी चाहिए। उदाहरण के तौर पर रोमन कैथोलिक सोचते हैं कि उनके संबंध में विवाह विच्छेद मान्य नहीं होना चाहिए। अगर वे सहमत हैं, वे कह सकते हैं कि विवाह विच्छेद के उद्देश्य से ‘‘हिंदू’’ शब्द में रोमन इकाइयों को इसमें सम्मलित नहीं किया जाना चाहिए।