366 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
बोलना चाहते हैं।
ख्वाजा इनायत उल्ला (बिहार) : महोदय इस खण्ड के बारे में कई संशोधन
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प्रस्तुत किए गए हैं ताकि सभी भारतीय लोगों को इसके दायरे में लाया जा सके और इस मुद्दे पर काफी कुछ कहा जा चुका है। इसलिए मैं मुस्लिम दृष्टिकोण पर कुछ प्रकाश डालना चाहता हूँ कि वे इसे स्वीकार करेंगे या नहीं। इसलिए मुझे भी कुछ समय दिया जाना चाहिए।
श्री आर. के. चौधरी : मैं सविनय उल्लेख करना चाहूँगा कि कल जब मैंने किसी संशोधन पर विरोध का यह प्रश्न उठाया था तब आपने कृपापूर्वक कहा था कि ऐसा विरोध करने दिया जाएगा। और मैंने विशेष रूप से उस संशोधन पर जोर दिया था जिसके द्वारा माननीय डॉ. अम्बेडकर “जनजाति” को शामिल करना चाहते हैं, जो बहुत ही महत्वपूर्ण मामला है। मैं उस पर बोलना चाहता हूँ : मैं दूसरे विषयों पर नहीं बोलूँगा।
उपाध्यक्ष महोदय : माननीय सदस्य महज इसलिए बोलने के हकदार नहीं हो जाते, क्योंकि उन्होंने कोई संशोधन प्रस्तुत किया है। जिन्होंने संशोधन प्रस्तुत किए हैं उन्हें मैं उन मुद्दों पर विस्तारपूर्वक बोलने की अनुमति दे रहा हूँ। परन्तु जब एक समान संशोधन प्रस्तुत किए गए हों और एक या दो माननीय सदस्य बोल चुके हों, तो समयाभाव के कारण यदि कोई माननीय सदस्य, जिन्होंने संशोधन प्रस्तुत किया है, और उन्हें समय नहीं दिया जा सकता, तो मुझे नहीं लगता है कि जहां तक इस मामले का संबंध है, मुझे प्रतीक्षा करने की आवश्यकता है। इस खण्ड 2 का हमने दूसरा वाचन किया है। जहां तक मेरे माननीय मित्र ख्वाजा इनायत उल्ला के अनुरोध का संबंध है, तो मैं गंभीरता से विचार कर रहा हूँ कि क्या उस संशोधन से इस विधेयक के दायरे का विस्तार नहीं होगा, जिसमें यह विधेयक मुसलमानों और ईसाईयों पर भी लागू करने की बात कही गई है। मुझे नहीं लगता कि इस मामले पर अब और चर्चा करना जरूरी है। जो कुछ भी हो, पंडित मालवीय के तुरंत बाद मैं माननीय मंत्री जी को आमंत्रित कर रहा हूँ।
श्री आर. के. चौधरी : मैं “जनजाति” शब्द को शामिल करने के बारे में डॉ. अम्बेडकर के संशोधन का विरोध करना चाहता था।
श्री जे. आर. कपूर : महोदय, प्रयोज्यता का दायरा बढ़ाने वाले संशोधन की स्वीकार्यता के बारे में आपने जो निर्देश दिया है उसके संबंध में मैं बताना चाहता हूँ कि यह मुद्दा पहले भी उठाया गया था और माननीय अध्यक्ष ने हमें आश्वस्त किया था कि इस मुद्दे पर कोई विनिर्णय दिए जाने से पहले इस मामले पर हमें अपने