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विचार रखने का अवसर दिया जाएगा। अध्यक्ष का पहले चाहे यह विचार हो कि शायद यह दायरे के भीतर नहीं है, परन्तु आप कृपया हमें यह सिद्ध करने का अवसर दें कि कितनी आसानी से यह दायरे के भीतर आता है। यदि आपका यही विनिर्णय है तो मेरा निवेदन है कि मेरे मित्र माननीय डॉ. अम्बेडकर द्वारा प्रस्तुत संशोधनों में से अनेक संशोधन दायरे के बाहर घोषित किए जाने होंगे।
उपाध्यक्ष महोदय : क्या डॉ. अम्बेडकर को भी सदन से बाहर कर देना होगा?
श्री जे. आर. कपूर : उन्हें नहीं, उनके कुछ संशोधनों को; क्योंकि वे भी इसी संशोधन के समान हैं।
उपाध्यक्ष महोदय : एक गलत संशोधन से दूसरा संशोधन अच्छा नहीं हो जाता। यदि माननीय विधि मंत्री जी के किसी संशोधन से भी दायरा बढ़ जाता है तो हम उस मामले पर विचार करेंगे।
पंडित मालवीय : मेरा एक और संशोधन है जिसकी सूचना मैंने दी है - यह एक छोटा-सा संशोधन है जिसे मैं कल अपने भाषण के अन्त में प्रस्तुत करूंगा।
उपाध्यक्ष महोदय : बशर्ते वह मात्र औपचारिक संशोधन हो।
पंडित मालवीय : इसका नोटिस मैंने परसों दिया था।
ख्वाजा इनायत उल्ला : मैं कुछेक मिनट से ज्यादा समय नहीं लूँगा। उपाध्यक्ष महोदय : जी, नहीं।
श्री आर. के. चौधरी : महोदय, मेरे मुद्दे का क्या होगा ?
उपाध्यक्ष महोदय : माननीय सदस्य के पास ’हां’ या ’नहीं’ का विकल्प उपलब्ध है। यदि वे चाहें तो इस खण्ड के विरोध में मतदान कर सकते हैं।
अब आधे घण्टे की चर्चा की शुरूआत करने में बहुत विलम्ब हो गया है। अब इसे किसी और दिन शुरू किया जाएगा।
तत्पश्चात सदन गुरुवार, दिनांक 20 सितम्बर, 1951 को साढ़े आठ बजे तक के लिए स्थगित हो गया।