368 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
* हिन्दू कोड-जारी
श्री अमोलख चन्द (उत्तर प्रदेश) : महोदय इससे पहले कि पंडित मालवीय अपना भाषण फिर से शुरू करें मैं आपका ध्यान एक व्यंग्यचित्र की ओर दिलाना चाहता हूँ जो आज इण्डियन न्यूज क्रॉनिकल में प्रकाशित हुआ है, जिसके बारे में एक नोट मैंने आपको भेजा था। क्या मैं जान सकता हूँ कि क्या इस पर चर्चा अभी शुरू की जाएगी या किसी और तारीख को की जाएगी?
माननीय सदस्यगण : व्यंग्यचित्र की विषय-वस्तु क्या है?
श्री अमोलख चन्द : अध्यक्ष महोदय की अनुमति से क्या मैं इस कार्टून के बारे में माननीय सदस्यों की उत्सुकता का समाधान कर सकता हूँ?
उपाध्यक्ष महोदय : इण्डियन न्यूज क्रॉनिकल में प्रकाशित यह कार्टून मुझे मिल चुका है। मेरा विचार है कि इसमें मुझे दिखाया गया है। यह एक दीवार घड़ी का कार्टून है जिसके दोनों हाथ कुछ माननीय सदस्य पकड़े हुए हैं, जिन्होंने इस विधेयक के विरोध में विचार रखे थे। लेकिन घड़ी के नीचे जो पेन्डुलम है वह यथावत है, वह न इधर जा रहा है न उधर, यह मेरा प्रतिनिधित्व करता है। जब तक इस आसंदी पर अध्यक्ष विराजमान हैं, बात दूसरी है। परन्तु अध्यक्ष पद पर लांछन लगाना न केवल अन्यायपूर्ण और गरिमाहीनता है, बल्कि यहां तो यह तथ्यों के विपरीत भी है। मैं नहीं जानता कि क्या कोई भी माननीय सदस्य इस बात को उठाएगा कि मेरे उनसे चाहे जो मतभेद रहे हों, मैने कभी इस सदन में ऐसा कुछ किया है जो अन्यायपूर्ण हो। माननीय सदस्यगण : नहीं, नहीं।
उपाध्यक्ष महोदय : इसलिए मैं इस मामले को देखूँगा। अध्यक्ष की आसन्दी पर चाहे कोई भी हो- अध्यक्ष पद पर लांछन लगाना बहुत गंभीर मामला है। जिस क्षण सदन यह महसूस करता है कि इस समय आंसदी पर विराजमान व्यक्ति न्याय नहीं कर रहा है, जहां तक उस व्यक्ति का संबंध है, सदन जानता है कि क्या किया जाना चाहिए। परन्तु किसी बाहरी व्यक्ति को यह चित्र खींचने का अधिकार नहीं है और यह पूरे सदन पर लांछन लगाने जैसा है। मैं सावकाश इस मामले को देखूँगा और फिर देखूँगा कि क्या कार्रवाई की जानी चाहिए। बहरहाल, मैं नहीं चाहता कि इससे इस विधेयक की प्रगति में कोई रूकावट आए।
श्री टी. एन. सिंह (उत्तर प्रदेश) : साथ ही उस कार्टून के बारे में चाहे जो कुछ कार्रवाई की जानी हो, हम भी महसूस करते हैं कि प्रेस को ऐसा कुछ प्रकाशित नहीं
’संसदीय वाद-विवाद, खंड XV भाग II, 20 सितंबर, 1951 पृष्ठ 2901-19