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करना चाहिए, जिसमें इस सम्माननीय सदन के अध्यक्ष पद पर लांछन लगाए गए हों और इसे रोका जाना चाहिए। मैं महसूस करता हूँ कि यह मामला, चँकि इसे उठाया गया है, अत्यंत महत्वपूर्ण है और इसे इस तरह स्थगित नहीं किया जाना चाहिए। मेरा अनुरोध है कि मामला जब एक बार उठाया गया है, हमें निःसंदेह इस पर बहस करनी चाहिए और सदन को इस पर अपनी अस्वीकार्यता व्यक्त करनी चाहिए।
उपाध्यक्ष महोदय : मुझे इस पर विचार करने में समय लगेगा।
* पंडित मालवीय (उत्तर प्रदेश) : कल जब मैंने अपनी बात बंद की थी तब आपने कृपापूर्वक पूछा था कि मुझे और कितना समय चाहिए। मैंने कोई समय-सीमा बताने में अपनी असमर्थता व्यक्त की थी और मैंने आपसे मुझे इस आधार पर अपनी बात जारी रखने का अनुरोध किया था कि मैं यथासंभव कम से कम समय में अपनी बात समाप्त करूँगा। आपने कृपापूर्वक एक सीमा निश्चित की थी कि मुझे लगभग ढाई घंटे या उससे ज्यादा नहीं लेना चाहिए।
श्री सिद्धवा (मध्यप्रदेश) : महोदय, आपने आधा घंटा कहा था।
पंडित मालवीय : मैंने अभी सुना........
उपाध्यक्ष महोदय : मैं केवल एक टिप्पणी कर सकता हूँ। कल माननीय विधि मंत्री जी ने परिहास में दिए गए एक सुझाव में माननीय सदस्य को पांच दिन मांगने के लिए प्रोत्साहित किया था।
विधि मंत्री (डॉ. अम्बेडकर) : वे पांच दिन चाहते थे- मैंने पांच घंटे का सुझाव दिया था।
उपाध्यक्ष महोदय : जब मैंने पूछा कि माननीय सदस्य लगभग कितना समय और लेंगे, तो विधि मंत्री जी ने मजाक में कहा था कि पाँच दिन। मैं आधे घंटे का सुझाव दे रहा था और माननीय सदस्य और ज्यादा समय चाहते थे। अब मैं करना यह चाहता हूँ कि........ पंडित मालवीय : क्या मैं........
उपाध्यक्ष महोदय : मैं माननीय सदस्य के साथ पर्याप्त न्याय करूंगा। क्या मैं अब जान सकता हूँ कि माननीय विधि मंत्री जी उत्तर देने में तकरीबन कितना समय लेंगे?
* संसदीय वाद-विवाद, खंड XV भाग II, 20 सितंबर, 1951 पृष्ठ 2902-18