370 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
डॉ. अम्बेडकर : मैं संक्षेप में अपनी बात कहना चाहता हूँ लेकिन उठाए गए कुछ मुद्दों को भी शामिल करना चाहूँगा और मेरा विचार है कि एक घंटा या सवा घंटा मेरे लिए पर्याप्त होगा।
उपाध्यक्ष महोदय : माननीय सदस्य इस समय बोल रहे हैं उनकी बात पूरी होते ही मैं माननीय विधि मंत्री को आमंत्रित करना चाहता हूँ। यदि वे ढाई घंटे भी लेते हैं तो माननीय विधि मंत्री जी को 12 बजे आंमंत्रित करने पर भी पर्याप्त समय रहेगा।
श्रीमती दुर्गाबाई (मद्रास) : माननीय सदस्य अभी बोलने के लिए खड़े हैं। उन्होंने पांच घंटे या पांच मिनट या पता नहीं कितने समय की बात करके कहा था कि वे अध्यक्ष के विनिर्णय का अनुपालन करेंगे और आपने कृपापूर्वक कहा था कि उन्हें आधे घंटे से ज्यादा समय नहीं लेना चाहिए। अध्यक्ष का विनिर्णय मान लेने के बाद क्या माननीय सदस्य को बात से पलटने की इजाजत होगी?
उपाध्यक्ष महोदय : मैं इसे माननीय सदस्यों पर छोड़ता हूँ।
पंडित मालवीय : कल मैंने एक दूसरे मामले के बारे में कहा था कि जब हमारी माननीय बहन नियम बनाती हैं, तो हमें कई बातों का पालन करना पड़ेगा, जिनसे,
खुशकिस्मती से हमें अभी छूट मिली हुई है।
श्रीमती दुर्गाबाई : यह तो नियमावली में पहले से ही है।
उपाध्यक्ष महोदय : नियमावली के अन्तर्गत जहां तक धन विधेयकों का संबंध है, मैं समय-सीमा निर्धारित कर सकता हूँ। अन्य विधेयकों से संबंधित भाषणों पर समय-सीमा के निर्धारण का कोई प्रावधान नहीं है।
श्रीमती दुर्गाबाई : मेरा मुद्दा यह है कि अध्यक्ष द्वारा एक बार व्यवस्था दे दिए जाने पर ........
उपाध्यक्ष महोदय : व्यवस्था नहीं।
श्रीमती दुर्गाबाई : ........क्या माननीय सदस्य को उस व्यवस्था के विरुद्ध जाने की अनुमति दी जा सकती है?
उपाध्यक्ष महोदय : इसकी व्याख्या व्यवस्था के रूप में नहीं की जानी चाहिए। यह केवल एक सुझाव है। दरअसल, मैं भूल ही गया था कि संशोधनों पर मुझे सदन से मतदान भी कराना है। इसलिए यदि माननीय सदस्य दो घंटे की समय-सीमा में रहते हैं और अध्यक्ष को आधा घंटा उपलब्ध कराते हैं तो मैं 11.30 बजे माननीय