हिंदू कोड-जारी - Page 387

372 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

मुद्दों पर वे सामूहिक रूप से बोल चुके हैं- इस समय यदि माननीय सदस्य शिकायत करते हैं और समयाभाव के कारण और समय-सीमा और दबाव के कारण वे सभी मुद्दों पर अपने विचार नहीं रख पाते हैं तो वे यहां किसी भी व्यक्ति के साथ न्याय नहीं कर रहे हैं। मैं ऐसी किसी भी छवि से बचना चाहता हूँ कि हम इस उपाय को जल्दबाजी करके आगे बढ़ा रहे हैं। यह हो सकता है कि किसी-किसी अभिमत को पर्याप्त समर्थन न मिला हो। आखिर हमें इस सदन में बहुमत के नियम से चलना पड़ता है और सभी व्यक्ति अपना दृष्टिकोण व्यक्त करने और उस पर जोर देने के लिए स्वतंत्र हैं परन्तु यह न कहा जाए कि हम मामले में जल्दबाजी कर रहे हैं। माननीय सदस्य ने दो घंटे लिए हैं। यदि वे चाहें तो दो घंटे और ले सकते हैं और यदि वे किसी कारणवश आगे बढ़ने के लिए तैयार नहीं हैं तो उन्हें इसे मुद्दा बनाने की जरूरत नहीं है, अन्यथा छवि यह बनेगी कि हमनें मामले में कोई जल्दबाजी की है, जबकि हम यथावकाश आगे बढ़े हैं। इसलिए इस प्रंकार की छवि नहीं बननी चाहिए। वे बोलने के लिए स्वतंत्र हैं और विभिन्न कारणों से न बोलने के लिए भी स्वतंत्र हैं, यदि वे विषय बाह्य हो। मेरा संबंध केवल इस सदन की प्रक्रिया और सदन के भीतर और बाहर इसकी उचित छवि से है कि ऐसे महत्वपूर्ण मामले पर हम न तो कोई जल्दबाजी कर रहे हैं और न ही किसी प्रकार की अडंगेबाजी करके बहस को अनावश्यक आगे खींच रहे हैं। इस प्रकार इन दो प्रकार की छवियों के बीच मैं यह विधेयक आगे बढ़ाने का प्रयास कर रहा हूँ। माननीय सदस्य को उन सब बातों का संदर्भ देने की कोई आवश्यकता नहीं है। जो कुछ भी उन्हें कहना हो या परवर्ती खण्डों का हवाला देना हो या उनकी कोई बात ही नहीं करनी हो या किसी कारण से जिसे वे सही और उचित समझते हों, कोई टिप्पणी करनी हों तो यह सब उनकी इच्छा के अधीन है।

पंडित मालवीय : आपके मुखारविन्द से निकली टिप्पणियों से मैं पूर्णतः सहमत

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हूँ और मैं कोई शिकायत नहीं कर रहा था। मैं केवल उल्लेख कर रहा था कि जो कारण आपने बताए हैं उन्हें छोड़कर जितना समय मुझे लेना चाहिए उससे अधिक समय नहीं लूँगा। यही निवेदन मैं करना चाहता हूँ। इससे इस सदन के अन्य अनेक सदस्यों को भी कुछ कहने का अवसर मिलेगा, क्योंकि कल मैंने देखा कि वे कुछ कहने का अवसर प्राप्त करने के लिए उत्सुक हैं। मैं यह बात शिकायत के तौर पर नहीं कह रहा हूँ, लेकिन मैं निवेदन कर रहा था कि मुझे दरअसल जो सब कहना था उसे छोड़ रहा हूँ और अब मैं सीधे एक या दो मुद्दों पर आना चाहता हूँ।

कल जब बैठक विसर्जित हुई थी, मैं नए संविधान में कृषि भूमि को समवर्ती सूची में शामिल करके इस विधेयक का दायरा बढ़ाए जाने के बारे में जो बात मैं कर रहा था उसे छोड़ देता हूँ।