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यदि मैं विस्तार से बताऊंगा तो समय लगेगा, इसलिए मैं ऐसा नहीं करूँगा, लेकिन सिद्ध किया गया है कि पैथीनिसी का यह प्रावधान सब लोगों पर लागू नहीं होता है, यह औरस अन्य लोगों पर लागू नहीं होता है। उनके मामले में सात और पांच पीढि़यां लागू होती हैं और ये पांच और तीन पीढि़यों की बात केवल दत्तक पुत्रों और सपत्नी माताओं पर ही लागू हो सकती है। इस प्रकार मीमांसा शास्त्र में इन दोनों का समाधान किया गया है।
मैंने यह उदाहरण यह सिद्ध करने के लिए दिया है कि शास्त्रों की व्याख्या करने का एक स्पष्ट तरीका है। यदि हम शास्त्रों के अनुसार चलना चाहते हैं तो हमें तदनुसार चलना चाहिए और देखेंगे कि विवाह सपिण्ड प्रतिबंध की सात और पांच पीढि़यों से हटने की कहीं भी स्वीकृति नहीं है।
इसी प्रकार, मैं एक अन्य प्रश्न पर आता हूँ। एक सदस्य ने कुछ न्यायसंगत संतोष के साथ और ओजपूर्ण स्वर में पढ़कर सुनाया था कि एक बार विवाहित स्त्री के विवाह के प्रावधान हमें स्मृतियों में मिलते हैं। मेरे एक माननीय मित्र ने - जो यहीं पर हैं : विख्यात नारद स्मृति और पाराशर ग्रन्थ से पढ़कर सुनाया था और उन्होंने कहा था कि स्मृतियों में ही कहा गया है कि एक स्त्री का विवाह दूसरी बार भी हो सकता है। मैं देख सकता हूँ कि कुछ मित्रों को यह सुनकर सन्तोष हुआ है। यह एक त्रासद मामला है, क्योंकि यदि इस श्लोक की व्याख्या एक विवाहित युगल के संबंध में की जाए तो इसका अर्थ ही विकृत हो जाता है। मुझे आशा है कि माननीय सदस्य नहीं समझेंगे कि मैं हवा में बात कर रहा हूँ (एक माननीय सदस्यः नहीं, नहीं )। पंक्तियाँ बहुत सरल हैं :
| Col1 | Col2 |
|---|---|
| f |
| frj | U;k |
|---|
| fo | èkh | ;r |
|---|
नष्टे मृते प्रव्रजिने, क्लीवे च पतिते पतौ।
पञचस्वापत्सु नारीणां पतिरन्यो विधीयते।
पति के लापता हो जाने, मृत्यु हो जाने, सन्यासी हो जाने, नपुंसक होने, पतित होने पर स्त्री के लिए दूसरे पति का विधान किया गया है।
दिखने में यह बहुत सरल है। ये मित्र समझते हैं कि इन, इन और इन पतियों के मामले में दूसरा पति मिल जाता है। परन्तु मैं चाहता हूँ कि सदन के सदस्य कृपा करके इस पर विचार करें। इस प्रश्न में व्याकरण के आसान नियम शामिल हैं।
एक माननीय सदस्य का कहना है कि व्याकरण पढ़ाओ और किसी को भी ऐसी प्रतिष्ठित कक्षा का अध्यापक बनने का लालच हो आएगा, लेकिन मैं इस लालच से पार पाते हुए इस मामले को संक्षेप में स्पष्ट करूंगा क्योंकि यही वह बात है