हिंदू कोड-जारी - Page 400

385

पंडित मालवीय : मैं यह नहीं कहता कि यह हर किसी पर लागू नहीं होना चाहिए; दूसरों के बारे में विचार करना सरकार और अन्य लोगों का काम है। उन्होंने एक सीमित उपाय प्रस्तुत किया है जो केवल विवाह और विवाह-विच्छेद से संबंधित है और यदि वे समझते हैं कि इसे पूरे देश पर लागू किया जाना उचित है तो क्यों न उन्हें ऐसा करने दें। यह एक अलग बात है जिस पर सरकार को विचार अवश्य करना चाहिए।

श्री भट्ट (बम्बई) : लेकिन क्या हम सदस्य सरकार से यह मांग नहीं कर सकते हैं कि इसे सभी पर लागू किया जाना चाहिए।

पंडित मालवीय : निःसंदेह। कई लोगों ने ऐसा कहा है।

ज्ञानी जी. एस. मुसाफिर : मेरा विचार है कि इसकी मांग करना हम सबका कर्त्तव्य है।

पंडित मालवीय : यह एक महत्वपूर्ण मुद्दा है और मुझे आशा है कि सरकार इस पर विचार करेगी।

अध्यक्ष : मैं माननीय सदस्य से पूछती हूँ कि क्या उन्हें यह नहीं लगता कि हम और लोगों को जो उपदेश देते हैं उस पर पहले खुद भी अमल करें, तभी न हमारे पास एक बेहतर और मजबूत मामला बनेगा?

पंडित मालवीय : महोदया, मैं अध्यक्ष से बहस करने की धृष्टता नहीं कर सकता। मैं यह दोहराते हुए अपनी बात समाप्त करूंगा कि इस सदन के सदस्य जिम्मेवारी के जिस पद पर बैठे हैं, उसकी जरूरत को समझेंगे और इस उपाय पर गंभीरता से विचार करेंगे ताकि हिन्दू समाज की प्राचीन और पुरातन परम्पराओं और जीवन की बुनियाद से कोई हलके और निरादरपूर्ण तरीके से छेड़छाड़ न करें और उसे नष्ट न कर सकें।

श्री जाजू (मध्य भारत) : महोदया, अब प्रश्न प्रस्तुत किया जाए। (अवरोध)

बाबू रामनारायण सिंह (बिहार) : महोदया, मैं कुछ कहना चाहता हूँ।

अध्यक्ष : इस मुद्दे का निर्णय मैं खुद नहीं कर रही हूँ। मैं इसे सदन पर छोड़ती हूँ। क्या मैं पूछ सकती हूँ कि माननीय कानून मंत्री इसका उत्तर देने में कितना समय लेंगे?

डॉ अम्बेडकर : जो लम्बे भाषण और विभिन्न प्रकार के तर्क दिए गए हैं उन्हें देखते हुए मैं लगभग सवा घंटा लूँगा; संभव है कि इससे ज्यादा समय भी लगे, मैं नहीं जानता।