हिंदू कोड-जारी - Page 401

386 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

अध्यक्ष : यदि संशोधनों के लिए आधा घंटा लगता है और कानून मंत्री अपने उŸार के लिए सवा घंटा लेने जा रहे हैं तो हमें यह बहस साढ़े ग्यारह बजे तक समाप्त करनी होगी। इस बीच यदि माननीय सदस्यगण अपनी बात दस मिनट में कहने के लिए तैयार हों ताकि और सदस्य भी बहस में भाग ले सकें, तो मैं यह बहस ठीक साढ़े ग्यारह बजे समाप्त करना चाहूँगी।

श्री नजीरुद्दीन अहमद (प. बंगाल) : यह निर्णय लिया गया था कि संशोधनों को सदन के पटल पर नहीं रखा जाएगा।

पंडित मालवीय : उपाध्यक्ष महोदय ने कहा था कि वे कानून मंत्री को साढ़े ग्यारह बजे उत्तर देने के लिए आमंत्रित करेंगी। चूँकि हमारे पास समय है, इसलिए अन्य सदस्यों को बोलने का मौका दिया जा सकता है और यदि आप समझते हैं कि यह जरूरी नहीं है तो दस मिनट का नियम निर्धारित नहीं किया जाना चाहिए।

अध्यक्ष : अध्यक्ष की आसंदी पर एक महिला विराजमान है और वह निष्पक्ष होकर कार्य नहीं करेगी ऐसा सोचकर माननीय सदस्यों को जल्दबाजी में कोई फैसला नहीं करना चाहिए। मैं हर व्यक्ति की धार्मिक भावनाओं का उतना ही सम्मान करना चाहती हूँ जितना इस सदन की। उपाध्यक्ष महोदय ने सदन से कहा है कि संशोधनों के लिए आधा घंटा लिया जाएगा। यह सच है कि माननीय मंत्री जी से साढ़े ग्यारह बजे उत्तर देने के लिए कहा जाएगा। लेकिन एक और पारम्परिक प्रक्रिया है अर्थात् समापन प्रस्ताव। इन दोनों बातों को ध्यान में रखते हुए मैं चाहती हूँ कि बहस ठीक साढ़े ग्यारह बजे समाप्त हो जाए न कि उसके बाद।

श्री वी. जे. गुप्ता (मद्रास) : समापन प्रस्ताव का क्या होगा?

अध्यक्ष : जब सदन इस बात पर सहमत है कि माननीय कानून मंत्री जी को बहस का उत्तर देने के लिए साढ़े ग्यारह बजे बुलाया जाए, तो उस प्रस्ताव की कोई आवश्यकता नहीं है। समापन और इसकी मंजूरी से सहमति सदैव बेहतर है।

* ख्वाजा इनायत उल्ला (बिहार) : (उर्दू भाषण का अनुवाद) बहुत सोच विचार करने के बाद मैंने फैसला किया था इस बिल पर मैं कुछ नहीं कहूँगा। आज भी मैं इस मामले पर कुछ भी न बोलने के फैसले पर कायम हूँ चाहे हिन्दू कोड बिल पास हो या न हो। ठीक है, यह एक अलहदा बात है ........

एक माननीय सदस्य : कहिए ........ कहिए........

ख्वाजा इनायत उल्ला : मुझे कहना चाहिए लेकिन मैं कहना नहीं चाहता। यह

* संसदीय वाद-विवाद, खंड XV भाग II, 20 सितंबर, 1951 पृष्ठ 2926-96