हिंदू कोड-जारी - Page 402

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एक अलग बात है कि हमारे भाई भी अपनी बहनों और बेटियों से वैसा ही व्यवहार करना चाहते हैं जैसा कि मैं खुद करता हूँ। लेकिन जैसा कि इस बिल को ‘‘हिन्दू कोड बिल‘‘ नाम दिया गया है और यह कहा गया है कि यह कानून खास तौर से उन लेगों के लिए बनाया जा रहा है जो हिन्दू मजहब को मानते हैं, तो मजहब को देखते हुए मैं महसूस करता हूँ कि एक मुसलमान होने के नाते हिन्दुओं के सामाजिक कानून में मुझे दखलंदाजी करना मुनासिब नहीं है, जिसमें वे कोई बदलाव कर रहे हैं या करना चाहते हैं।

एक माननीय सदस्य : एक इंसान होने के नाते तो करना चाहिए।

ख्वाजा इनायत उल्ला : जी, हां। इंसान होने के नाते ही कर रहा हूँ लेकिन इंसान होने के साथ ही मैं एक हिन्दुस्तानी हूँ और एक मुसलमान भी। इसीलिए मैं अपना नजरिया अपने मजहब के अनुसार बताना चाहता हूँ। अब तक किए गए सभी संशोधनों ने मुझे अपनी बात कहने के लिए मजबूर कर दिया है। एक संशोधन यह है कि उन सभी को यानी मुसलमानों, ईसाईयों और मुख्तलिफ लोगों को जिन्हें इस कानून के लागू होने से छूट मिली हुई है उन सबको इसमें शामिल किया जाए।

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ख्वाजा इनायत उल्ला : जब वे ऐसा चाहते हों और वे भी जो ऐसा नहीं चाहते। संशोधन सं. 90 इस प्रकार है : ‘‘यह कोड सभी भारतीय लोगों पर लागू होगा, चाहे उनका धर्म, जाति, पंथ कुछ भी हो।‘‘ इसी प्रकार संशोधन सं. 91, 92 और 93 में भी यही कहा गया है। कुछ सदस्यों - विशेष रूप से मेरे माननीय मित्र डॉ. श्यामाप्रसाद मुखर्जी ने यह संशोधन प्रस्तुत करते हुए शुरूआत में ही कहा था कि भारत में ‘‘धर्मनिरपेक्षता‘‘ एक रोग की तरह फैल रही है। मुझे यह कहते हुए खेद है कि मेरे फाजिल दोस्त, यह समझते हैं कि धर्मनिरपेक्षता एक रोग है, जबकि यह रोग नहीं बल्कि उसका इलाज है और चाहते हैं कि इसके अंतर्गत सभी कानून एक समान बनाए जाएं, यानी हिन्दुओं के लिए जो कानून बनाए जाते हैं उन्हें मुसलमानों पर भी लागू किया जाए। यह बिल्कुल सही है यदि यह (कानून) कोई आर्थिक कानून है, कोई राजनैतिक कानून है जो भारत में किसी के चरित्र या सामाजिक जीवन को प्रभावित करता है, तो इसे जरूर एक समान होना चाहिए; परन्तु धर्मनिरपेक्षता का तात्पर्य यह कदापि नहीं है कि ऐसे कानून या वैयक्तिक कानून बनाए जाएं जो हिन्दुओं और मुसलमानों के लिए एक समान हों। इसका तात्पर्य है कि हिन्दुओं और मुसलमानों के लिए एक ही बात कही जाएगी; हालांकि यह जरूरी नहीं कि वैयक्तिक कानून के बारे में भी यही बात हो, क्योंकि हमारे ऐसे कई कानून हैं जो हिन्दुओं के कानून से अलग हैं। कल ही मेरे एक सिख सहयोगी ने कहा था कि उनके कानून भी हिन्दुओं