हिंदू कोड-जारी - Page 403

388 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

के कानून से अलग हैं। मैं मामले के उस पहलू पर चर्चा नहीं करना चाहता, लेकिन जो बात मुसलमानों पर लागू होती है उसके बारे में निवेदन करना चाहता हूँ।

हमारे माननीय मंत्री श्री गाडगिल जी ने कल अपने भाषण में कहा था कि वे हिन्दुओं के सामाजिक कानून को बदलना चाहते हैं और इस बदलाव के लिए उन्होंने जो तर्क दिया और मेरा ख्याल है बड़ी कामयाबी से दिया क्योंकि इस कानून में बदलाव हो रहे हैं इसलिए हमें भी इसमें बदलाव करने का हक है लेकिन उन्होंने आगे यह भी कहा था कि वे इसे इस तरह से तैयार करने की कोशिश करेंगे कि आने वाले वक्त में इसमें मुसलमानों को भी शामिल किया जा सके। उनसे मैं विनम्र निवेदन करना चाहता हूँ कि वे उस कानून में बदलाव कर सकते हैं क्योंकि, जैसा कि उन्होंने सिद्ध किया कि हिन्दू कानून में बदलाव हो रहा है। लेकिन यहां मैं उनसे कहना चाहता हूँ कि मुस्लिम कानून में पिछले 1350 वर्षों में न तो कोई बदलाव हुआ है और न ही आने वाले वक्त में कोई बदलाव होगा। क्योंकि मुसलमानों की यह मान्यता है कि उनके विवाह और जायदाद के बंटवारे से जुडे़ कानून उन्होंने नही बनाए बल्कि ईश्वर ने बनाए हैं, इस धरती पर रहने वाले किसी भी इंसान को उसे बदलने का कोई हक नहीं है।

सरदार बी.एस. मान (पंजाब) : क्या पंजाब के मुसलमान शरियत या रिवायत के कानून का अनुपालन करते हैं, जो शरियत से सर्वथा भिन्न है?

ख्वाजा इनायत उल्ला : यदि कोई कहता है कि पंजाब के मुसलमान शराब

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पीते हैं तो इसका मतलब यह कतई नहीं है कि सभी मुसलमानों को शराब पीना शुरू करने की इजाजत है। यदि कोई मुसलमान कुछ गलत करता है तो क्या इसका मतलब यह हुआ कि सभी को ऐसा करने की इजाजत दी जाएगी? यदि कोई मुसलमान इस्लामी कानून का पालन नहीं करता, तो मैं जबरदस्ती उससे यह कराने के लिए तैयार नहीं हूँ। वह आजाद है; चाहे वह अपने जमीर के खिलाफ जाए; मजहब के खिलाफ या समाज के खिलाफ जाए। लेकिन जब तक वह कुछ करके समाज को नुकसान नहीं पहुंचाता, न मैं उसके मामले में दखल दे सकता हूं और न ही सरकार।

सरदार बी.एस. मान : इस्लामी कानून के अनुसार एक चोर को जिन्दा जमीन में

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दफन कर देना चाहिए या उसके हाथ काट दिए जाने चाहिएं। क्या किसी इस्लामी देश में यह कानून लागू है?

ख्वाजा इनायत उल्ला : मेरे दोस्त श्री मान ने एक युक्तिसंगत प्रश्न उठाया है।

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यदि वे मुझसे बाहर मिलें तो मैं संतोषजनक तरीके से समझा दूँगा। यहाँ मैं सदन का और ज्यादा वक्त नहीं लेना चाहता। इस्लाम में कुछ कानूनों के लिए इजाजत है कि उन्हें किस सीमा तक देश के कानून के मुताबिक बनाया जा सकता है और