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सीमा भी बताई गई है जिसे लांघा नहीं जाना चाहिए। मैं उनसे निवेदन करना चाहूँगा कि यदि किसी इस्लामी देश में चोर को इस्लामी कानून के मुताबिक सजा नहीं दी जाती, तो कानून को बदलने की भी इजाजत दी गई है। लेकिन कुछ कानून ऐसे भी हैं जिन्हें हम बदल नहीं सकते। इसलिए मैं इन दोस्तों से निवेदन करना चाहूँगा कि ........
मेरा ज्यादातर वक्त मेरे दोस्तों ने टोकाटाकी करके ले लिया। उतना वक्त तो मुझे मिलना चाहिए।
अध्यक्ष : वह नहीं दिया जाएगा।
ख्वाजा इनायत उल्ला : मैं निवेदन कर रहा था कि इस सदन के लिए यह सही रास्ता नहीं है कि मुसलमानों के लिए कोई ऐसा कानून बनाया जाए, जो उनके धार्मिक आदेशों के जरा भी खिलाफ जाता हो। यह बिल बहुमत से पारित किया जा सकता है, लेकिन मैं यह विनम्र निवेदन करना चाहता हूँ कि किसी के साथ कोई
खास कानून मानने की जबरदस्ती नहीं की जानी चाहिए। बहुमत से हमें मजबूर नहीं किया जाना चाहिए। मैं चाहता हूँ कि मुसलमानों को इस कानून से सहमत होने के लिए बाध्य नहीं किया जाना चाहिए। कोई भी बहुमत से पारित दूसरे कानूनों से सहमत होने से इंकार नहीं करेगा। मेरे कुछ दोस्तों ने कहा कि भारत में रहने वाले सभी लोग हिन्दू हैं। मैं खुद को हिन्दू कहने में गर्व महसूस करता हूँ। मैं भी कहता हूँ कि भारत में रहने वाले सभी लोग हिन्दू हैं। मैं एक सच्चा राजनैतिक हिन्दू हूँ। आज से नहीं बल्कि पिछले बीस-पच्चीस सालों से मैं अपने आपको एक राजनैतिक हिन्दू कहता आया हूँ। यहां मैं यह भी कहना चाहता हूँ कि राजनैतिक दृष्टि से एक हिन्दू होने के अलावा मैं मुसलमान हूँ और मुसलमान बना रहूँगा।
एक माननीय सदस्य : आपकी नस्ल क्या है?
ख्वाजा इनायत उल्ला : मैं हिन्दू हूँ। मेरे पूर्वज ब्राह्मण थे और ब्राह्मण खून ही मेरी रगों में दौड़ रहा है - वही खालिस खून जो अब तक किसी और से जाकर नहीं मिला है।
खैर, मेरी तकरीर का लब्बो-लुआब यह है कि ऐसा कोई कानून हम पर न थोपा जाए जो हमारे धर्म और ईश्वर के आदेशों के खिलाफ है। लेकिन एक भारतीय होने के नाते मुझे किसी भी सामाजिक या आर्थिक कानून को मानने से कोई इंकार नहीं है।
* कुमारी पद्मजा नायडू (हैदराबाद) : मैं इस अवसर पर इस विधेयक को अपना पूर्ण समर्थन देती हूँ। सबसे पहले मैं सरकार को इस कानून के प्रति व्यापक और
* संसदीय वाद-विवाद, खंड XV भाग II, 20 सितंबर, 1951 पृष्ठ 2929-33