हिंदू कोड-जारी - Page 411

396 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

डॉ. मुखर्जी शायद यह तथ्य भूल गए कि बुद्ध से लेकर गांधीजी तक सुधारवादियों की श्रृंखला में मध्यक्रम में राजा राममोहन राय, केशव चन्द्र सेन और रामकृष्ण परमहंस जैसे बंगाल के महान व्यक्ति भी थे। इन सुधारों को रोकने के लिए चिल्लपों करना एक बंगाली नेता को शोभा नहीं देता। यह सही तरीका नहीं है। हिन्दू धर्म एक प्रगतिशील धर्म है। विभिन्न स्मृतियों और मीमांसाओं में हिन्दू कानून का संहिताकरण ही किया गया है। जैसा कि मेरी मित्र श्रीमती पद्मजा नायडू ने, जिन्होंने अपनी काव्यात्मक शैली में डॉ. अम्बेडकर को बधाई भी दी है, उन्होंने बताया है कि हमारे संविधान ने भारत की महिलाओं को कुछ अधिकार प्रदान किए हैं और डॉ. अम्बेडकर संविधान के मंतव्यों को कार्यरूप प्रदान करने से बढ़कर और कुछ नहीं कर रहे हैं।

मेरे माननीय मित्र सरदार मान एक महान राष्ट्र, एक लड़ाकू राष्ट्र से आते हैं, जिसने शरत की स्वतंत्रता की रक्षा की हैं और उसे बनाए रखा है। लेकिन उन्होंने यह कहकर कि सिख हिन्दू नहीं है; एक असंगत बात कह दी है। मुझे कई सिख नेताओं के साथ कार्य करने का सौभाग्य प्राप्त हुआ है। इसलिए हम हिन्दू कोड बिल पर अपने मतभेदों की बात न करें। लेकिन मैं यह कह सकता हूँ कि यदि सिखों की राय जानी जाए तो अब या इसके बाद वे गतिहीन नहीं रहना चाहेंगे। जब कभी उनकी राय ली जाएगी तो हम देखेंगे कि सिख महिलाएं भी प्रगति और तरक्की के पक्ष में हैं।

जहाँ तक पंडित गोविन्द मालवीय का संबंध है, मैं उनसे बहुत स्नेह करता हूँ क्योंकि मैं उनके श्रद्धेय एवं पूज्य पिता स्व. पंडित मदन मोहन मालवीय का सहायक रहा हूँ। मुझे तीस के दशक का स्मरण हो आता है जब हम इस सदन में बाल विवाह निषेध अधिनियम पारित कर रहे थे, पंडित मदन मोहन मालवीय तो ऋषि तुल्य थे, उन्होंने समय की नजाकत को समझा और वे चाहे इस बात से नाखुश थे कि इस सदन ने बाल विवाह निषेध अधिनियम, जिसे शारदा एक्ट भी कहा जाता है, अधिनियमित कर दिया, लेकिन उन्होंने मेरे युवा मित्र पंडित गोविन्द मालवीय की तरह इसका इतनी हिंसक भाषा में और इतने कड़े शब्दों में विरोध नहीं किया था।

पंडित मालवीय : लेकिन इन बातों का प्रस्ताव तब नहीं किया गया था।

श्री बी. दास : यह सच है। लेकिन मैं केवल अपने नेता और उनके श्रद्धेय पिता की बात बता रहा था कि वे तरक्की और प्रगति के पक्षधर थे। बस इतना ही निवेदन मैं करना चाहता था।

श्री ए. सी. शुक्ला (मध्य प्रदेश) : उनके लिए जो कमजोर हैं, आप सर्वोच्च आदर्श

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