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विशेष के संबंध में क्या किया जाना चाहिए, इस पर चर्चा करने के लिए पार्टी की कई बैठकें हुई थीं। मुझे यह बहुत अच्छी तरह स्मरण है कि जितनी भी बैठकें हुई थीं, उनमें से अधिकांश में डॉ. श्यामाप्रसाद मुखर्जी उपस्थित थे, इसके बावजूद मुझे एक भी ऐसा अवसर याद नहीं आता, जब पार्टी की बैठकों में, जो अनौपचारिक होती हैं और जिनके दौरान सरकार के सदस्य अपना व्यक्तिगत अभिमत व्यक्त कर सकते हैं जिसे वे बाहर संयुक्त उत्तरदायित्व के कारण अन्यथा व्यक्त नहीं कर सकते, उनमें डॉ. श्यामाप्रसाद मुखर्जी ने इस विधेयक के विरुद्ध कुछ भी कहा हो। इसलिए,
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त्यागपत्र दे दिया है) मुझे खेद है यह कहते हुए कि मेरे विचार से यह एक बहुत बड़ी त्रासदी है कि एक सौम्य, शांत और सुशील व्यक्ति है जो पियक्कड़ों की टोली में शामिल होकर इधर से उधर झूम रहा है और खुद भी वही हो गया है।
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एक माननीय सदस्यः तुलना अच्छी है।
डॉ. अम्बेडकर : सरकार छोड़ने और विपक्ष के सदस्य बनने, बल्कि विपक्ष में
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अग्रिम पंक्ति के सदस्य बनने के बाद से ही मैं डॉ. श्यामाप्रसाद मुखर्जी की कार्यशैली देखता आ रहा हूँ और मेरा ध्यान इस बात पर गया है कि उन्होंने वह दुर्भाग्यपूर्ण मानसिकता विकसित कर ली है जिसे कभी-कभी नेता, प्रतिपक्ष विकसित कर लेते हैं, यानी सरकार के प्रत्येक कदम का विरोध करना। इसे देखते हुए जब कोई व्यक्ति मामले पर उसके गुणदोषों के आधार पर चर्चा करने के लिए तैयार नहीं रहता बल्कि केवल विरोध करने के उद्देश्य से उसका विरोध करना चाहता है तो मुझे लगता है कि उसकी बहस का उत्तर देने के लिए किसी को अपना समय और ऊर्जा खर्च करना शायद ही जरूरी है। यही कारण है कि डॉ. श्यामाप्रसाद मुखर्जी ने जो कुछ कहा उसे मैं बहुत गंभीरता से नहीं लेना चाहता।
इसलिए मैं केवल सामान्य मुद्दों पर अपनी बात कहना चाहता हूँ, जिन्हें विभिन्न वक्ताओं ने खण्ड 2 के और इस विधेयक के बारे में सामान्यतः उठाया है। पहली बात, जो शायद नई बात है, वह यह है कि जिस प्रकार का विधेयक चर्चा के लिए प्रस्तुत किया गया है, वास्तव में उसकी कोई आवश्यकता ही नहीं है। यह कहा गया है कि हिन्दू समाज एक अत्यंत प्राचीन समाज है जो रोमन और ग्रीक समाज से भी अधिक प्राचीन और संभवतः मिस्र के समाज जितना ही प्राचीन है। यह तर्क प्रस्तुत किया गया है कि आज हम रोमन समाज या ग्रीक समाज या मिस्र के समाज के बारे में जो कुछ भी जानते हैं, वह उनका इतिहास है। ये समाज अब अस्तित्व में नहीं हैं और ये विलुप्त हो चुके हैं। केवल हिन्दू समाज ही एकमात्र प्राचीन समाज है जो आज भी जीवित है और यदि हिन्दू समाज आज जीवित है जबकि अन्य सभी