हिंदू कोड-जारी - Page 417

402 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

कभी नहीं आई। आपको ब्राह्यणों द्वारा अस्पृश्य स्त्रियों से, क्षत्रियों को शूद्रों से और शूद्रों द्वारा उच्च जाति की स्त्रियों से विवाह के अनेक उदाहरण मिलेंगे।

पंडित मालवीय : कौन-कौन से उदाहरण हैं?

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डॉ. अम्बेडकर : मैं आपको कई उदाहरण बता सकता हूँ यदि आप मेरे कक्ष में आएं। मेरे पास उपलब्ध हैं।

पंडित मालवीय : अभी क्यों नहीं?

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डॉ. अम्बेडकर : परन्तु आर्यां में वर्ग विभाजन की इतनी कठोर सामाजिक व्यवस्था कभी नहीं थी, जो बाद में लागू की गई। इस बात से कोई इंकार नहीं कर सकता कि यह परिवर्तन बाद में हुआ है।

आप हिन्दू महिलाओं की स्थिति को देखें। हमारे माननीय मित्र डॉ. मैत्रा ने, जो मेरा ख्याल है कि राव समिति के भी सदस्य थे, उन्होंने कलकत्ता विश्वविद्यालय से डॉक्टरेट डिग्री की थीसिस के लिए ’हिन्दू शास्त्रों में महिलाओं की स्थिति’ शीर्षक से एक पुस्तक लिखी है। जो कोई यह पुस्तक पढ़ता है उसे ज्ञात होगा कि सम्पत्ति में स्त्रियों का हिस्सा पुरुषों के बराबर था। उसे सम्पत्ति का मालिकाना हक भी था। यहां तक कि मनुस्मृति में भी ऐसा कहा गया है। हिन्दू समाज में आए परिवर्तनों के परिणामस्वरूप आज हम क्या देख रहे हैं? महिलाएं सम्पत्ति से पूर्णतः वंचित हैं। आप इस परिवर्तन को प्रगति कहेंगे या इस परिवर्तन को गिरावट कहेंगे? इसलिए मेरे विचार से अब समय आ गया है कि हम इस सवाल पर अलग तरीके से विचार करें। जिस मुद्दे की ओर मैं बढ़ना चाहता हूँ वह यह है कि जब तक कानून समाज को नहीं बढ़ाता, यह समाज आगे नहीं बढ़ेगा।

दूसरी बात जो इस सदन के समक्ष रखी गई थी वह इस प्रकार थी - कि हमारी कोई नीति नहीं है; हमारा कोई सिद्धांत नहीं है; जिस एक बात पर हम आगे बढ़ रहे हैं वह एक प्रकार से पश्चिमी राष्ट्रां की नकल है। ऐसा कहा जाता है कि क्योंकि पश्चिमी राष्ट्रों में एक पत्नी विवाह है, क्योंकि पश्चिमी राष्ट्रों में तलाक है अथवा क्योंकि चीन के लोग उस दिशा में कुछ करने का प्रयास कर रहे हैं इसलिए दुनिया की नजरों में अच्छे बने रहने के लिए हम भी उन्हीं की तर्ज पर कुछ करने का प्रयत्न कर रहे हैं। उन्होंने कहा है कि हमारा आदर्श क्या होना चाहिए? किसी ने कहा राम; किसी ने कहा दशरथ; किसी ने कहा कृष्ण; किसी ने कहा यह और किसी ने कहा वह। इस सदन के समक्ष प्रस्तुत आदर्शों पर मैं कोई टिप्पणी नहीं करना चाहता और मैं नहीं चाहता कि ........