27 कुछ माननीय सदस्य : नहीं! नहीं!
श्रीमती दुर्गाबाई : आखिर उन्होंने जो कहा मैं तो यही समझी। अगर ऐसा है तो मैं उन्हें बताना चाहूँगी कि वह मसला पहले ही तय हो चुका है।
माननीय अध्यक्ष : मुझे अफसोस है कि माननीय सदस्य जो मुद्दा उठा रहे थे, उसे अन्य माननीय सदस्य नहीं समझे। उन्होंने यह कभी नहीं कहा कि यह सदन सक्षम नहीं है बल्कि इसके विरुद्ध उनका कहना है कि यह सदन पूर्णरूप से सक्षम है।
श्री इन्द्र विद्यावाचस्पति : पहले मैं जो कहना चाहता हूँ पूरा कर लूँ और तब शायद इस बारे में कोई संदेह नहीं रहेगा।
इस विधेयक के द्वारा सरकार एक बहुत बड़ी चीज प्राप्त करना चाहती है, वह है, वे सभी अन्याय जो महिलाओं के साथ होते हैं, दूर करना चाहती हैं। मैं नहीं समझता कि कोई भारतीय समाज सुधारक ऐसा है जो सरकार के साथ इस विषय में सहयोग न करेगा या इस प्रस्तुति में साथ नहीं देगा। लेकिन मैं उन लोगों से, जो हिंदू महिलाओं पर हुए अन्याय को हटाना चाहते हैं, एक बात पूछना चाहता हूँ। यह भी अन्याय ही है कि पुरुष एक समय में चार महिलाओं से विवाह कर सकता है। लेकिन महिला को ऐसा करने की अनुमति नहीं है। यह अन्याय है। यह हटना चाहिए। यह अन्याय क्या केवल हिंदू महिलाओं के साथ ही होता है और क्या मुस्लिम महिलाओं के साथ नहीं होता? मैं अपनी बहनों से पूछता हूँ क्यों वे यह सहन करेंगी कि यह न्याय केवल हिंदू महिलाओं को ही मिले और मुस्लिम महिलाओं को नहीं? उनके साथ होने वाले इस अन्याय को भी हटाना चाहिए।
यह कैसे सहन किया जा सकता है कि यह अन्याय उन पर सतत होता रहे। उन्हें भी सरकार इस कानून में क्यों नहीं सम्मिलित करती? यह कहा जाता है कि यदि ऐसा कानून मुसलमानों और दूसरों के लिए बना तो उसका अर्थ उनके धर्म में दखल देना होगा। अगर सामाजिक कानूनों का बनना उनके धर्म में दखल देना है तो यह धर्म में हस्तक्षेप है तो यह सभी में है। मेरी राय में यह हस्तक्षेप नहीं है। कानून मुसलमानों, सिखों, ईसाईयों सभी पर समान रूप से लागू होना चाहिए। इसमें कोई भेदभाव नहीं होना चाहिए। हमारा उतना ही कर्तव्य है कि हम मुसलमान महिलाओं और दूसरे धर्मों की महिलाओं के साथ उतना ही न्याय करें जितना न्याय हम हिंदू महिलाओं को देते हैं। इसलिए यहाँ इस विधेयक का वर्तमान रूप नहीं होना चाहिए।
इसका दूसरा पहलू यह भी है कि इस विधेयक को बनाने में कुछ कठिनाइयाँ हो सकती हैं। जैसा कि हम जानते है बम्बई में बहुविवाह कानून को उच्च न्यायालय