28 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
में चुनौती दी गई थी और अदालत ने इसे अवैध घोषित किया था। यह समाचार समाचार-पत्रों में भी प्रकाशित हुआ था।
कुछ माननीय सदस्य : हाईकोर्ट में नहीं, निचली अदालत में।
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श्री इन्द्र विद्यावाचस्पति : ठीक है निचली अदालत में हुआ होगा। ऐसी
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कठिनाइयाँ आएंगी। इस कानून को अदालत में चुनौती दी जाएगी। बम्बई में अपने हाल ही के बयान में डॉ. देशमुख ने हमारा ध्यान इस पहलू की ओर दिलाया है। अगर हम यह विधेयक पारित करते हैं और इसको चुनौती दी जाती है और इसको उच्च न्यायालय या उच्चतम न्यायालय में भेजा जाता है तो हमें नई कठिनाइयों का सामना करना पड़ सकता है। अगर हम इसे केवल हिंदुओं पर लागू करें तो भी ऐसी कठिनाइयाँ आएंगी। सरकार महसूस कर सकती है कि इस विधेयक को प्रस्तुत किए हुए आवश्यकता से अधिक समय हो गया और फिर भी इसको आगे बढ़ाना सम्भव क्यों नहीं हुआ। यहाँ तक कि हिंदू सुधारक संगठनों ने भी इसे पूरा सहयोग नहीं दिया है। सुधारक भी इसमें संशोधन प्रस्तुत कर रहे हैं। मेरे विचार से इसका कारण यह है कि हम समाज सुधार के गलत तरीके अपना रहे हैं। अगर कुछ पंक्तियाँ गलत रखी गई हैं तो उनको सुधारने के दो तरीके हैं। पहले तरीके से हम उनके बीच में एक लाइन बना सकते हैं या दूसरे तरीके में उन्हें मिटा दें और उसके बदले एक नई सीधी लाईन खींचें। लेकिन हो क्या रहा है एक लाइन दूसरी लाईन में जुड़ी है अतः इसमें जबरदस्ती फंसाया जा रहा है। मेरे विचार से अच्छा तरीका यह होगा कि इसे पुनर्विचार के लिए वापस ले लिया जाए जिसे पूरी तरह समर्थन मिल सके। जैसा कि हमने एक समान राजनैतिक नियम और आर्थिक नियम बनाए हैं। उसी तरह हमें एक ऐसा सामाजिक नियम भी लाना चाहिए जो पूरे देश पर लागू हो सके। ऐसा विधेयक आगे लाना चाहिए।
अगर हिंदू महिलाएँ कुछ कठिनाइयाँ सहती हैं तो मुसलमान महिलाएँ भी उनका सामना करती हैं। जब हमने ऐसा व्यापक संविधान बनाया है जो पूरे देश के लिए है और समान आर्थिक नियम भी बनाए हैं। तब यह विधेयक बनाना कठिन नहीं है। याद रहे सत्य अटल है; स्थान, समय और व्यक्ति इसमें बाधक नहीं हो सकते। अगर यह सिद्धांत सही है, तब यह सबके लिए सत्य है, और अगर यह सत्य नहीं है तब यह किसी के लिए भी सच नहीं हो सकता। मेरे विचार से सरकार का इरादा अच्छा है। यह अच्छा होगा यदि पूरे देश को इसका लाभ मिले। इस विधेयक का प्रारूप फिर से बनाना चाहिए और यहाँ प्रस्तुत किया जाना चाहिए।
मैं एक चीज और प्रस्तुत करना चाहता हूँ, कि हमें यहाँ कानूनी कठिनाइयाँ और जटिलताओं का बहुत अधिक सामना करना पड़ा, वे सभी हल हो गईं और बहुत