हिंदू कोड-जारी - Page 421

406 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

डॉ. अम्बेडकर : मैं श्री अनंतशयनम अय्यंगर के वक्तव्य की बात कर रहा हूँ। मुझे प्रसन्नता है कि माननीय सदस्य आज इतनी तकनीकी बात कर रहे हैं।

श्री श्यामनंदन सहाय : मैं हमेशा ही करता हूँ। लेकिन माननीय मंत्री जी मंत्रिमंडल

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के सदस्य होने की अपनी स्थिति का फायदा उठा रहे हैं।

डॉ. अम्बेडकर : मैं देख रहा हूँ कि इस विधेयक पर हुई बहस के दौरान, जो वर्ष 1937 में हुई थी, मेरे माननीय मित्र श्री अनंतशयनम अय्यंगर ने स्वयं ही इस विधेयक के लागू होने की बात उठाई थी और मैं यहां देख रहा हूँ कि उनका भाषण दो पेज लम्बा है। जैसा कि मैंने कहा कि उन्होंने यही प्रश्न उठाया था कि क्या

खोजा समुदाय को जो विकल्प दिया गया था, यह विधेयक उसे वापस ले लेगा। यह प्रश्न उन्होंने सीधे श्री जिन्ना से किया था, क्योंकि जैसा कि सदन को याद होगा, शरियत विधेयक सरकारी था और श्री जिन्ना ने इसे पेश किया था वही विधेयक के प्रभारी थे। और श्री जिन्ना ने एकदम स्पष्ट उत्तर श्री अनंतशयनम अय्यंगर को दिया था कि न केवल यह विधेयक अनिवार्य है, बल्कि इस विधेयक से खोजा समुदाय को दिया गया विकल्प वापस ले लिया जाएगा।

पंडित मैत्रा : क्यों न उस विधेयक की पृष्ठभूमि भी सदन को बताई जाए? जब विधेयक पर चर्चा की जा रही थी तब मैं भी वहां उपस्थित था और मैं जानता हूँ कि श्री जिन्ना कतई नहीं चाहते थे कि मुसलमान किसी हिन्दू कानून द्वारा नियंत्रित हों।

डॉ. अम्बेडकर : मैं पुस्तक आपको दे सकता हूँ, जो यहीं मेरे पास है। जो कोई पूरी बहस को पढ़ना चाहता है, पढ़ सकता है। मैं अब इस पर और ज्यादा समय नहीं देना चाहता क्योंकि मुझे संशोधनों पर चर्चा करनी है

श्री जे आर. कपूर : वह बहस किस वर्ष हुई थी?

डॉ. अम्बेडकर : वर्ष 1937 में। केवल एक कठिनाई........

श्री भट्ट : वह शरियत विधेयक पारित किया गया था या चयन समिति को भिजवाया गया था या निरस्त कर दिया गया था?

डॉ. अम्बेडकर : विधेयक पारित किया गया था और यह निर्णय लिया गया था कि कोई विकल्प नहीं दिया जाता है।

केवल एक कठिनाई जो सामने आई थी वह इस प्रकार थी कि जब उन्हांने खण्ड 3 शामिल किया था तब उन्होंंने इसे प्रारूपकार की सहायता के बिना इसे सदन में