हिंदू कोड-जारी - Page 423

408 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

जहां विधानसभा ने विवाह और विवाह-विच्छेद को विनियमित करने वाले कानून अधिनियमित किए हैं। उन दोनों अधिनियमों में किसी भी प्रकार का विकल्प नहीं दिया गया है। प्रत्येक व्यक्ति जो वहां रहता है अथवा जहाँ उसका अधिवास है, उस पर वे अनिवार्यतः लागू होते हैं। यदि हम इस कानून को अपनाएं, तो यह केन्द्रीय कानून होने के कारण और उनसे अलग होने के कारण यह प्रांतीय विधानमंडलों द्वारा बनाए गए कानूनों का स्थान ले लेगा, क्योंकि यह कानून समवर्ती क्षेत्र का कानून है। इसका एक परिणाम यह होगा कि एकपत्नी विवाह और विवाह-विच्छेद के मामले में बम्बई और मद्रास ने जो कुछ प्रगति की है वह पूरी तरह नष्ट हो जाएगी।

श्री गौतम (उत्तर प्रदेश) : बम्बई में मुसलमानों की स्थिति क्या होगी?

डॉ. अम्बेडकर : यह केवल हिन्दुओं पर ही लागू होता है। मैं अभी मुसलमानों पर भी आऊंगा, चिंता न करें। मैं यह बात छोडूँगा नहीं। इसलिए इसका एक परिणाम यह होगा कि दोनों राज्य, जिन्होंने जो कुछ भी सामाजिक प्रगति हासिल की है, उससे पिछड़ जाएंगे।

श्री जे. आर. कपूर : इसे जारी रखिए।

डॉ. अम्बेडकर : कैसे रख सकते हैं?

श्री. जे. आर. कपूर : यह कहकर कि “इस अधिनियम में किसी बात के होते हुए भी यह ........”

डॉ. अम्बेडकर : मेरे माननीय मित्र को संतुष्ट करने के लिए यह अच्छा कानून है। तो, इस परिणाम पर भी हमें विचार करना होगा।

आज की स्थिति क्या है? कुछेक राज्यों में एकपत्नी विवाह और विवाह-विच्छेद से संबंधित कानून हैं। कुछ अन्य राज्यों में ऐसा कोई कानून नहीं है एक बात का ध्यान रखा जाना है कि हमारे संविधान के अंतर्गत किसी भी राज्य को बाह्य क्षेत्राधिकार नहीं है। यह कानून निवासी पर लागू है जो वहां का निवासी है अथवा किसी व्यक्ति पर लागू है जिसका वहां अधिवास है। यदि कोई व्यक्ति बम्बई में विवाह करता है तो उसे राज्य के अधिनियम के अंतर्गत विवाह करना होगा। यदि वह अपनी पत्नी को जिन आधारों पर तलाक देना चाहता है जो बम्बई के कानून में अनुमत्य नहीं है तो वह आराम से उत्तर प्रदेश जा सकता है, जहां ऐसा कोई कानून मौजूद नहीं है, अपनी पत्नी को तलाक दे सकता है और फिर से विवाह कर सकता है और इस तरह बम्बई के कानून की वैधता पूर्णतः नष्ट हो जाती है। यह कुछ-कुछ शराबबंदी जैसा है। एक अकेला राज्य शराबबंदी लागू नहीं कर सकता। यदि शराबबंदी होनी