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हैं। उसका उत्तर मैं दे रहा हूँ कि हमारा संविधान हमें अलग-अलग सम्प्रदायों से अलग-अलग व्यवहार की अनुमति देता है और यदि हम उनसे अलग - अलग व्यवहार कर रहे हैं तो कोई सरकार पर भेदभाव करने का आरोप नहीं लगा सकता। यही बात मैं कहना चाहता हूँ। इसी के साथ दूसरी बात जो मैं सदन को बताना चाहता हूँ वह इस प्रकार है कि अनुच्छेद 25 इसी कारण से एक अत्यंत महत्वपूर्ण अनुच्छेद है। जैसा कि सदन को स्मरण होगा कि यूरोप के पूरे इतिहास में चर्च और राज्य के बीच भारी मतभेद रहता आया है। राज्य ने कहा है कि चर्च धर्म के मामले में हस्तक्षेप नहीं करेगा और राज्य ही चर्च के मुकाबले सर्वोपरि है। दूसरी ओर चर्च ने कहा कि राज्य चर्च के अधीन है; जब चर्च अनुमति दे तभी राज्य कानून बना सकता है। सामान्यतः यही स्थिति रहती आई है। हमने अपने संविधान में मध्यमार्ग अपनाया है। हमने यह मार्ग अपनाया है कि हम लोगों को अपना धर्म मानने और अनुसरण करने की अनुमति देते हैं, और संयोग से अपने वैयक्तिक कानून की भी; क्योंकि वैयक्तिक कानून उनके धर्म में सन्निहित है, परन्तु राज्य ने अनुच्छेद 25 में इस देश के किसी भी सम्प्रदाय के वैयक्तिक कानून में हस्तक्षेप करने का अधिकार सदैव अपने पास रखा है। इसके विरुद्ध कोई तर्क किया ही नहीं जा सकता। यही बात मैं कहना चाहता हूँ। प्रश्न केवल समय, अवसर और परिस्थितियों का है।
इस सदन में मैं यह बात दृढ़तापूर्वक कहना चाहता हूँ कि जब तक मैं पद पर हूँ मैं किसी सम्प्रदाय का यह तर्क नहीं सुनूँगा कि संसद को उसके वैयक्तिक कानून या किसी और कानून में हस्तक्षेप करने का कोई अधिकार नहीं है। यह संसद सर्वोपरि है और हम किसी भी सम्प्रदाय, धर्म के अलावा जहां तक उसके व्यक्तिगत कानून का संबंध है, पर कार्रवाई करते हैं। कोई भी सम्प्रदाय यह न समझे कि वह इस संसद के संप्रभु प्राधिकार से उन्मुक्त है।
श्री ए. सी. शुक्ला : आप कानून पारित कर सकते हैं परन्तु उसे लागू नहीं कर सकते।
डॉ. अम्बेडकर : यहां एक छोटी-सी अड़चन है और यह इस प्रकार है - क्या हम हिन्दू कोड बिल को जिसे हमने घोषित रूप से, सुविचारित तरीके से और समझ बूझकर जिसे हम हिन्दू समुदाय कहते हैं उस पर लागू करने के मंतव्य से तैयार किया है, क्या हमें इस विधेयक को मुसलमानों पर लागू करना चाहिए।
श्री जे. आर. कपूर : गैर-हिन्दूओं पर भी।
डॉ. अम्बेडकर : ऐसे विधान को तैयार करते समय हम एक पूर्वोदाहरण की स्थिति के रूप में एक निश्चित प्रक्रिया का पालन करते आ रहे हैं। सभी सामाजिक विधान तैयार करते समय सरकार आमतौर पर एक परिपाटी के तौर पर, और यदि