हिंदू कोड-जारी - Page 427

412 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

मैं कहूँ एक बाध्यकारी परिपाटी के तौर पर-किसी विधान विशेष पर कार्य शुरू करने से पहले प्रभावित लोगों से परामर्श करने के नियम का पालन करती है। माननीय सदस्यों को ज्ञात है कि इस विधेयक के संबंध में भी एक समिति का गठन किया गया था, जो एक प्रांत से दूसरे प्रांत, एक राज्य से दूसरे राज्य में गई और उसने प्रत्येक तबके, प्रत्येक समुदाय, व्यक्तियों, संगठित लोगों से, यह जानने के लिए कि उनकी राय क्या है, साक्ष्य एकत्र किए।

यह कोई नहीं कह सकता कि जहां तक इस विधेयक का प्रश्न है, किसी समिति अथवा सरकार ने कभी मुस्लिम समुदाय के साथ विचार-विमर्श किया हो, कि जहां तक हिन्दुओं का संबंध है हम एक पत्नी विवाह कानून बनाने और विवाह-विच्छेद के कानून में सुधार करने जा रहे हैं और ये प्रावधान हैं जो हम उन पर लागू करना चाहते हैं, तो आपका इस संबंध में क्या कहना है? ऐसा कोई कदम नहीं उठाया गया और मेरा परामर्श है कि मुस्लिम समुदाय से पहले कोई परामर्श किए बिना उस पर ऐसा कोई प्रावधान लागू करना न केवल अनुचित होगा बल्कि यह अत्यंत अन्यायपूर्ण राजनैतिक कार्रवाई होगी।

पंडित मैत्रा : तो यह आपने पहले क्यों नहीं किया?

डॉ. अम्बेडकर : ऐसा हमने इस कारण से नहीं किया क्योंकि कुछ समुदायों को जैसे हिन्दू समुदाय को सुधारने की सख्त जरूरत थी। गंदगी को साफ करना जरूरी था।

पंडित मैत्रा : आप में ऐसा करने का साहस ही नहीं था।

डॉ. अम्बेडकर : यह गंदगी को साफ करना है।

श्री श्यामनन्दन सहाय : क्या आपने सिख समुदाय से परामर्श किया था?

डॉ. अम्बेडकर : जी, हां। मैं इस बात पर आ रहा हूँं। तसल्ली रखें। मैंने उनसे परामर्श किया था। आप समझने में गलती न करें।

श्री भट्ट : क्या माननीय मंत्री जी बता सकते हैं कि यदि संसद चाहे तो क्या मुसलमानों और ईसाइयोंं की राय अभी भी ली जा सकती है? ऐसा करने में क्या अड़चन है?

डॉ. अम्बेडकर : अड़चन यह है कि मेज पर अब खाना परोस दिया गया है अब आइये, हम खाना शुरू करें। और लोगों को बुलाने में समय लगेगा। अभी हमारे पास इतना खाना भी नहीं है कि हम दूसरों को दे सकें।