414 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
श्री श्यामनंदन सहाय : यदि इस विधेयक का विरोध करने वाले सदस्यों पर माननीय मंत्री जी इस प्रकार की टिप्पणियां करें तो हमें उनके भाषण में रुकावट डालने का हक है।
अध्यक्ष महोदय : ऑर्डर, ऑर्डर।
श्री श्यामनंदन सहाय : यदि वे इस प्रकार की टिप्पणियां करते रहे तो स्थिति बदतर हो सकती है।
डॉ. अम्बेडकर : मुझे अपना मत व्यक्त करने का हक है।
अध्यक्ष महोदय : ऑर्डर, ऑर्डर।
श्री आर. के. चौधरी : आप मंत्री जी से क्यों नहीं कहते कि वे बैठ जाएं।
अध्यक्ष महोदय : इसका क्या मतलब है? शोरगुल हमेशा हो रहा है। माननीय सदस्यों को अनुशासन में रहना चाहिए।
श्री आर. के. चौधरी : यदि माननीय मंत्री जी बैठते नहीं हैं तो क्या यह अनुशासन है? आप केवल हमारे ऊपर नियंत्रण करना चाहते है; दूसरों पर नहीं।
डॉ. अम्बेडकर : मैं यह कहना चाहता हूँ (व्यवधान)।
सरदार बी. एस. मान : मैं इस कटाक्ष को खेल भावना से लेता हूँ। आज उनका भाषण हमारे लिए भी अरुचिकर है।
डॉ. अम्बेडकर : मैं यह स्वीकार करने के लिए तैयार हूँ।
अध्यक्ष महोदय : मैं केवल यही कह सकता हूँ कि माननीय मंत्री जी की टिप्पण् ा जिस सदस्य से संबंधित है, माननीय सदस्यों को यह बात उन्हीं पर छोड़ देनी चाहिए थी।
डॉ. अम्बेडकर : मेरी बात एकदम सरल है। इस पर कोई विवाद नहीं हो सकता कि हम भारतीय जो हैं वे मुसलमानों को छोड़कर........
श्री सोंधी (पंजाब) : वे भारतीय नहीं हैं। क्या यह सच है?
डॉ. अम्बेडकर : मुझे इसी तरह बोलने दीजिए, क्योंकि मेरे पास अभी कोई समुचित शब्द नहीं है। गैर - मुसलमान, ऐसा कहना एक परिवार जैसा नहीं लगता है। मुझे नहीं लगता कि अव्यावहारिक दृष्टिकोण रखना और कहना कि हम सब एक हैं, वांछनीय है। हम नहीं हैं। लेकिन मैं यह जरूर कहता हूँ कि जहां तक भी संभव