खंड 2 : (संहिता का प्रयोग) - Page 44

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से कानून पारित हो गए क्योंकि आज देश समानता और स्वतंत्रता के आधार पर उन्नति करना चाहता है। अगर इस सिद्धांत पर विधेयक का प्रारूप बनेगा और पूरे देश पर लागू होगा तो यह अवश्य ही पसन्द किया जाएगा। यह मेरा दृष्टिकोण है। लेकिन यह विधेयक ऐसा नहीं है। यद्यपि सरकार बहुत आशावादी है। यह बहुत ही अच्छा है कि वे आशावादी हैं, लेकिन उनके लिए इस विधेयक को पारित करवाना बहुत कठिन होगा, इसके लिए तीन महीने के सत्र की आवश्यकता होगी, तब भी इसे पारित करवाना बहुत कठिन होगा और इसके बाद फिर भी बहुत-सी कठिनाइयों का सामना करना होगा। अगर यह विधेयक पारित हो भी गया तो हमें इसे लागू करने से पहले बहुत-सी कठिनाइयों का सामना करना पड़ेगा; और हम कानूनी कठिनाइयों से घिर जाएंगे। इसलिए मैं उनसे, जिन्होंने यह विधेयक बनाया है पूछता हूँ और विशेष रूप से डॉ. अम्बेडकर जिन्होंने इसके लिए कठिन मेहनत की और पक्के इरादे से काम किया, उनका दृष्टिकोण बढ़ाने का और उनकी कानूनी व्यवसाय की योग्यताओं के साथ, ऐसा कानून बने जो केवल हिंदुओं पर ही नहीं सभी भारतीयों पर लागू हो सके। जैसा कि सत्यता का रास्ता सीधा है। विधेयक की वर्तमान कमियाँ अपने आप दूर हो जाएंगी।

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मैं अपनी माननीय बहनों से यह भी कहना चाहता हूँ कि जैसा कि वे चाहती हैं कि हिंदू महिलाओं को पूरा न्याय मिले वैसा ही मुस्लिम और दूसरे धर्मों की महिलाओं के लिए भी करें। वे तर्क दे सकती हैं कि उनको कौन मानेगा। लेकिन तुर्की में सुधार हुए, यह एक मुस्लिम देश है। और वहाँ सभी ने उन सुधारों को स्वीकार किया। जिस प्रकार उन मुस्लिम देशों में ये सुधार स्वीकार किए गए उसी प्रकार यहाँ भी बिना आपस के भेदभाव के स्वीकार किए जाएंगे। केवल तब ही हम इसे पारित करवा पाएंगे और अगर ऐसी परिस्थितियों में पारित हुए तब ऐसे कठिनाइयों से नहीं निपटा जा सकेगा। तब हमारे सामने बहुत सी कठिनाइयाँ होंगी और हमने इसे पारित कर भी दिया तो हमें बहुत ही कठिनाइयों का सामना करना होगा।

मैं यह सब हिंदू संहिता विधेयक की प्रगति में बाधा डालने के लिए नहीं कह रहा हूँ, मैं एक पक्का समाज सुधारक हूँ। मैं चाहता हूॅँ और यही मेरी मनोकामना है कि यह पारित हो मेरा प्रस्ताव है कि यह पारित हो और इसमें संशोधन किए जाएं जिससे यह पूरे देश में लागू किया जा सके। इसे ऐसे संशोधनों के बाद ही लागू किया जा सकेगा, अन्यथा नहीं।

श्री शिवचरण लाल (उत्तर प्रदेश) : मैं अपने नाम पर दिए गए संशोधन को प्रस्तुत

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करना चाहता हूँ। जब मुझे बुलाया गया तो मैं उपस्थित नहीं था।