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अन्य व्यक्ति जिन्होंने राव समिति के समक्ष साक्ष्य दिया, वे थे सरदार इकबाल सिंह।
वे एक वकील थे और अपनी व्यक्तिगत क्षमता में आए थे।
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डॉ. अम्बेडकर : उन्होंने कुछ नहीं कहा।
सरदार हुकम सिंह : तब तो उनका नाम आसानी से लिया जा सकता है।
एक माननीय सदस्य : उन्हें अपना बयान पढ़ने दीजिए।
डॉ. अम्बेडकर : रिकार्ड यहाँ है। आज जो सूचना चाहें, मिल सकती है। उन्हांने इस अधिनियम को सिखों पर लागू-किए जाने के बारे में कुछ भी नहीं कहा।
इसके बाद सरदार हरनाम सिंह आए, जो इस समय पंजाब उच्च न्यायालय के न्यायाधीश हैं, और उन्होंने अपना साक्ष्य एक सिख होने के नाते नहीं बल्कि बार कौसिल के प्रतिनिधि की हैसियत से दिया। उन्होंने ऐसा कोई भी सवाल नहीं उठाया कि इसे सिखों पर लागू नहीं किया जाना चाहिए।
सरदार हुकम सिंह : लेकिन हिंदू कोड बिल के बारे में उनकी राय क्या थी?
डॉ. अम्बेडकर : उन्होंने इसका विरोध नहीं किया है।
अब मैं एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम पर आता हूँ, जिसका उल्लेख मैं निश्चित रूप से करना चाहूँगा। सदन को याद होगा कि श्री मंडल द्वारा सदन में यह विधेयक पेश किए जाने के बाद और इसे राव समिति की जांच पूरी होने के बाद पेश किया गया था-तब भी सरकार ने वादा किया था कि विभिन्न प्रांतीय सरकारों में एक कार्यकारी परिपत्र परिचालित किया जाएगा और पेश किए गए विधेयक पर उनकी राय मांगी जाएगी। वह परिपत्र पंजाब को भी भेजा गया था।
श्री सांधी : यह किस वर्ष किया गया था? डॉ. अम्बेडकर : 1947 में।
श्री सोंधी : बंटवारे से पहले?
डॉ. अम्बेडकर : नहीं, बंटवारे के बाद। क्योंकि यह पत्र पूर्वी पंजाब सरकार को जारी किया गया है। मैं पूर्वी पंजाब सरकार के गृह सचिव, द्वारा सचिव, भारत सरकार,