420 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
अनेक संशोधन हैं जो पटल पर रखे गए हैं। पेश किए गए संशोधन कौन-कौन से हैं, यह माननीय सदस्य भूल गए होंगे। मैंने इन संशोधनों को उनकी विषय-वस्तु के अनुसार और खण्ड-वार भी समूहों में रख दिया है।
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जी ने दो संशोधन प्रस्तुत किए हैं।
डॉ. अम्बेडकर : केवल दो संशोधन हैं।
उपाध्यक्ष महोदय : मैं सभी संशोधनों की बात कर रहा हूँ। दो संशोधन जिन्हें
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माननीय मंत्री जी ने स्वयं प्रस्तुत किया और एक डॉ. टेकचन्द के नाम पर है, जिसे माननीय मंत्री जी स्वीकार करने के इच्छुक हैं सभी का ध्यान रखा जाएगा। संशोधन कौन-कौन से हैं यह सदन को बताना मेरा कर्त्तव्य है, जिनके पक्ष में या विरोध में सदस्यों को मतदान करना है। उनका अलग-अलग ब्यौरा देने के बजाए, और सुविधा की दृष्टि से मैं एक-एक करके प्रत्येक समूह के संशोधन आपको बताऊंगा। “अनिवार्यतः सभी भारतीयों पर लागू” अर्थात् न सिर्फ हिंदुओं पर बल्कि बौद्ध, जैन, गैर-हिंदुओं, मुसलमानों ईसाइयों आदि पर जो इस विधेयक के दायरे में आते हैं।
प्रश्न इस प्रकार है :
खंड 2 के स्थान पर निम्नलिखित को रखा जाएगा :
”2. कोड की प्रयोज्यता :-(1) यह कोड सभी हिंदुओं पर लागू होता है।
(2) इस कोड में जब तक अन्यथा उपबंधित न हो ”हिंदू“ शब्द से भारत का नागरिक अभिप्रेत है।
(3) विशेष विवाह अधिनियम, 1872 (1872 का III ) में किसी बात के होते हुए भी यह कोड उस अधिनियम में यथा परिभाषित हिंदुओं और जिनके विवाह यह कोड प्रवृत्त होने से पूर्व उस अधिनियम के उपबंधों के अतर्गत नहीं हुए हैं, उन पर लागू होगा।“
प्रस्ताव अस्वीकार किया गया।
उपाध्यक्ष महोदय : प्रश्न इस प्रकार है :
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खंड 2 के स्थान पर निम्नलिखित को रखा जाएगा :
“2. यह कोड सभी भारतीयों पर लागू होता है चाहे उनका धर्म, जाति पंथ कुछ भी हो।”