422 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
के भीतर और अवयस्क के मामले में ऐसे अवयस्क के वयस्क होने पर एक वर्ष के भीतर ऐसे प्राधिकारी के साथ और ऐसे तरीके से जिसे एतद्पश्चात् संसद द्वारा निर्धारित किया गया हो, अपना नाम पंजीकृत न कराया हो।“
प्रस्ताव अस्वीकार किया गया।
उपाध्यक्ष महोदय : प्रश्न इस प्रकार है :
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खंड 2 में निम्नलिखित परन्तुक को जोड़ा जाएगा :
“बशर्ते कि भाग II अथवा/एवं VII के विवाह तथा विवाह-विच्छेद और उत्तराधिकार संबंधी प्रावधान किसी व्यक्ति पर लागू नहीं होंगे, जब तक ऐसा व्यक्ति वयस्क होने की आयु प्राप्त होने के बाद लिखित में यह घोषणा नहीं करता है कि वह यथास्थिति उक्त प्रावधानों द्वारा शासित होगा अथवा होगी और ऐसी घोषणा को केन्द्रीय सरकार द्वारा इस प्रयोजनार्थ निर्धारित नियमों के अनुसार पंजीकृत नही कराता हैः
बशर्ते यह भी कि विवाह एवं विवाह-विच्छेद से संबंधित भाग II के प्रावधान ऐसी घोषणा करने वालों पर तभी लागू होंगे, जब विवाह से पूर्व दूल्हा और दुल्हन दोनों अथवा विवाह के पश्चात् पति और पत्नी दोनों ऐसी घोषणा करते हैं।“
प्रस्ताव अस्वीकार किया गया।
श्री जे. आर. कपूर : महोदय, मामले की बदली हुई परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए मैं सदन से अपने संशोधन सं. 97 और 272 को वापस लेने की अनुमति चाहता हूँ। लेकिन साथ ही मैं बाद में एक संशोधन प्रस्तुत करना चाहूँगा, जब विवाह और विवाह-विच्छेद से संबंधित इस पूरे अध्याय पर विचार-विमर्श कर लेने पर जब हम जान जाएंगे कि इस भाग की स्थिति क्या है।
सदन की अनुमति से संशोधन वापस लिए गए।
उपाध्यक्ष महोदय : अब संशोधन सं. 336 है, जो श्री जे. आर. कपूर के नाम पर
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है। क्या वे मुझे इसे पेश करने देना चाहते हैं?
श्री जे. आर. कपूर : जी, हां और मुझे आशा है कि माननीय मंत्री जी इसे पढ़ेंगे और देखेंगे कि इससे क्या अभिप्रेत है, अन्यथा वे जिसका प्रवर्तन कराना चाहते हैं उसका प्रवर्तन कराने में कठिनाई होगी।
उपाध्यक्ष महोदय : इस समय क्यों। सब अध्ययन पहले ही कर लिया गया
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है।