हिंदू कोड-जारी - Page 442

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प्रस्ताव अस्वीकार किया गया।

उपाध्यक्ष महोदय : प्रश्न इस प्रकार है :

mi kè;

खंड 2 के उप-खंड (2) के परंतुक में अंत में आने वाले ”मामलों के संबंध“ में निम्नलिखित को रखा जाएगा :

“उन मामलों के संबंध में, जिन्हें उस व्यक्ति ने स्वेच्छा से नहीं चुना है।”

प्रस्ताव अस्वीकार किया गया।

उपाध्यक्ष महोदय : प्रश्न इस प्रकार है :

mi kè;

खंड के उप-खंड (1) के बाद निम्नलिखित अंतःस्थापित किया जाएगा :

”(1 क) यह कोड अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों पर लागू नहीं होगा।”

प्रस्ताव अस्वीकार किया गया।

उपाध्यक्ष महोदय : संशोधन सं. 281 को हटाया जाता है। अब मैं औपचारिक

mi kè;

और मौखिक स्वरूप के संशोधनों पर आता हूँ। सबसे पहले मैं डॉ. अम्बेडकर के संशोधन सं. 3 को प्रस्तुत करूंगा।

प्रश्न इस प्रकार है :

खंड 2 में -

उप-खंड (1) में,-

( i ) भाग (क) में ”हिंदुओं, अर्थात् सभी व्यक्तियों को जो हिंदू धर्म को मानते हैं” के स्थान पर ”व्यक्ति जिनका धर्म हिंदू है” शब्द रखे जाएंगे;

( ii ) भाग (घ) में ”हिंदू धर्म“ के स्थान पर “हिंदू, बौद्ध, जैन अथवा सिख धर्म“ शब्द रखे जाएंगे;

(2) उप-खंड (4) का लोप किया जाएगा।

प्रस्ताव स्वीकार किया गया।

श्री आर. के. चौधरी : महोदय, मैं डॉ. अम्बेडकर के अगले संशोधन का विरोध करता हूँ। मेरे विचार से वे अपने जीवन की सबसे बड़ी भूल कर रहे हैं।

श्री जे. आर. कपूर : इसकी विषय-वस्तु क्या है?