428 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
उपाध्यक्ष महोदय : श्री चौधरी इसलिए विरोध कर रहे हैं क्योंकि डॉ. अम्बेडकर “जनजाति अथवा समुदाय’’ के स्थान पर “समुदाय” शब्द रखना चाहते हैं। शायद डॉ. अम्बेडकर को डर है कि जनजाति ”समुदाय“ में शामिल नहीं होती; इसलिए वे इसे और भी स्पष्ट करना चाहते हैं :
प्रश्न इस प्रकार है :
माननीय डॉ. बी. आर. अम्बेडकर द्वारा प्रस्तावित संशोधन में जो सं. 3 में मुद्रित है भाग (1)( i ) के बाद निम्नलिखित को अंतःस्थापित किया जाएगाः
”( i ) भाग (ग) ( ii ) में समुदाय“ के स्थान पर “जनजाति अथवा समुदाय“ शब्द रखे जाएंगे”
प्रस्ताव स्वीकार किया गया।
उपाध्यक्ष महोदय : प्रश्न इस प्रकार है :
खंड 2 के उप खंड (1) के भाग (क) में ”हिंदुओं, अर्थात् हिंदू धर्म को मानने वाले सभी व्यक्तियों“ के स्थान ”व्यक्तियों जिनका धर्म हिंदू है” शब्द रखे जाएंगे।
प्रस्ताव अस्वीकार किया गया।
उपाध्यक्ष महोदय : प्रश्न इस प्रकार है :
खंड 2 के उप-खंड (1) के भाग (ख) के स्थान पर निम्नलिखित शब्द रखे जाएंगे;
”(ख) बौद्ध, जैन अथवा सिख धर्म के सभी व्यक्तियों को;”
प्रस्ताव अस्वीकार किया गया।
डॉ. देशमुख (मध्यप्रदेश) : मैं उल्लेख करना चाहूँगा कि माननीय डॉक्टर साहब
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ने सुझाव दिया था कि वे इस खंड को अंतिम रूप से पारित करने को स्थगित रखना चाहते हैं।
उपाध्यक्ष महोदय : माननीय सदस्य शायद उपस्थित नहीं थे जब मैंने बाद में संशोधन करके कहा था कि नाम में केवल औपचारिक परिवर्तन किया गया है- कि इसे हिंदू कोड बिल कहा जाना चाहिए या हिन्दू विवाह एवं विवाह-विच्छेद (संशोधन) कोड कहा जाना चाहिए। यह केवल औपचारिक मामला है।
अब प्रश्न इस प्रकार है :