हिंदू कोड-जारी - Page 447

432 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

इसके अलावा यह भी कि तत्पश्चात् किसी को भी यह घोषणा करने की स्वतंत्रता होगी कि वह इस अधिनियम द्वारा नियंत्रित नहीं होगा और यह तब उस पर लागू नहीं होगा।”

प्रस्ताव अस्वीकार किया गया।

उपाध्यक्ष महोदय : प्रश्न इस प्रकार है :

खंड 2 के उप-खंड (1) के भाग (क) में ”सहित“ से पूर्व “बौद्ध, जैन तथा सिख“ को अन्तःस्थापित किया जाएगा।

प्रस्ताव अस्वीकार किया गया।

पंडित मालवीय : मैं अपने अगले संशोधन पर जोर नहीं देता।

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उपाध्यक्ष महोदय : अब हमने सभी संशोधनों का निपटारा कर लिया है। क्या कोई माननीय सदस्य ऐसे हैं, जिनका संशोधन मैंने सदन के सामने नहीं रखा है? मैं समझता हूँ कि ऐसा कोई नहीं है।

प्रश्न इस प्रकार है :

“कि यथा संशोधित खंड 2 इस विधेयक का भाग बनता है।”

प्रस्ताव स्वीकार किया गया।

यथा संशोधित खंड 2 विधेयक में जोड़ दिया गया।