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* हिंदू कोड-जारी
उपाध्यक्ष महोदय : यह सदन अब चयन समिति की रिपोर्ट के अनुसार हिंदू
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| Col1 | Col2 |
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कानून की कुछेक शाखाओं में संशोधन करने और उन्हें संहिताकृत करने के लिए इस विधेयक पर आगे और विचार-विमर्श करेगा। कल हमने खंड 2 का निपटारा किया; एक अत्यंत विवादास्पद खंड अब समाप्त हो गया है। मुझे आशा है कि अन्य
खंड भी शीघ्र पारित किए जाएंगे।
विधि मंत्री (डॉ. अम्बेडकर) : मैं अनुरोध करना चाहता हूँ कि :
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खंड 3 में,-
( i ) ”जब तक कोई बात, विषय अथवा संदर्भ से प्रतिकूल न हो” शब्दों के स्थान पर ”जब तक संदर्भ से अन्यथा अपेक्षित न हो” शब्द रखे जाएंगे”;
( ii ) मौजूदा मदों ( i ), ( ii ), ( iii ) तथा ( iv ) पुनः क्रमांकन ( ii ), ( iii ), ( iv ), ( v ) किया जाएगा और निम्नलिखित को मद सं. ( i ) के रूप में अंतःस्थापित किया जाएगा,
अर्थात् :
”(1)“ आलिया संतान कानून“ से उन व्यक्तियों पर लागू कानूनी प्रणाली अभिप्रेत है, जो, यदि यह कोड पारित नहीं किया गया होता, तो वे मद्रास आलिया संतान अधिनियम, 1949 (1949 का मद्रास अधिनियम IX ) द्वारा शासित होते;“
( iii ) पुनः क्रमांकन की गई मद ( iii ) में “धारा 41 तथा 49 को छोड़कर“ शब्दों का लोप किया जाएगा“;
( iv ) पुनः क्रमांकन की गई मद ( iv ) के स्पष्टीकरण में “यह खंड” के स्थान पर ”खंड ( iv ) और ( v )” शब्द रखे जाएंगे”;
( v ) मौजूदा मद ( v ), ( vi ), ( vii ) और ( viii ) का पुनः संख्यांकन मद सं. ( viii ), ( ix ), ( x ) और ( xi ) किया जाएगा और निम्नलिखित को मद ( vi ) और ( vii ) के रूप में अंतःस्थापित किया जाएगा; अर्थात् :
”( vi ) “मरूमक्कट्टयम कानून“ से निम्नलिखित व्यक्तियों पर लागू कानूनी प्रणाली अभिप्रेत है-
* संसदीय वाद-विवाद, खंड XV भाग II, 21 सितंबर, 1951, पृष्ठ 2974-3008