हिंदू कोड-जारी - Page 449

434 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

(क) जो मद्रास मरूमक्कट्टयम अधिनियम, 1932, मद्रास अधिनियम (मद्रास अधिनियम, 1933 का XXII ), ट्रावनकोर नायर अधिनियम, 1100 का II, ट्रावनकोर एझवा अधिनियम, 1100 का III, नंजिनदाद वेल्लाला अधिनियम, 1101, ट्रावनकोर क्षत्रिय अधिनियम, 1108 ट्रावनकोर कृष्णवकमरूमक्कथयी अधिनियम, 1115, कोचीन थिय्या अधिनियम, 1107 का VIII ; कोचीन नायर अधिनियम, 1113 का XXIX अथवा कोचीन मरूमक्कथयम अधिनियम, 1113 का XXXIII द्वारा शासित होते, यदि यह कोड पारित नहीं किया गया होता अथवा

(ख) जो किसी ऐसे समुदाय से संबंधित है, जिसके सदस्य अधिकांशतः ट्रावनकोर कोचीन अथवा मद्रास प्रांत के निवासी हैं और जो, यदि यह कोड पारित नहीं किया गया होता, तो वे उत्तराधिकार की किसी ऐसी प्रणाली द्वारा शासित हुए होते, जिसमें वंशक्रम का निर्धारण स्त्री की ओर से किया जाता है; परन्तु जिसमें आलियासंतान कानून शामिल नहीं है;

( vii ) “नम्बूद्री कानून“ से उन व्यक्तियों पर लागू कानून अभिप्रेत है, जो मद्रास नम्बूद्री अधिनियम, 1932 (1933 का मद्रास अधिनियम XXI ), कोचीन नम्बूद्री अधिनियम (1114 का XVII ), अथवा 1106 के ट्रावनकोर मलयाता ब्राह्मण अधिनियम, (1106 का विनियमन III ) द्वारा शासित हुए होते, यदि यह अधिनियम पारित नहीं किया गया होता;

मद ( viii ) में ( vi ) का पुनर्सख्यांकन इस प्रकार किया गया है कि “किसी भी” के स्थान पर ”एक“ शब्द रखा जाएगा।

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-खण्ड-दर-उप-खंड और विषय-दर-विषय आगे बढ़ना बेहतर रहेगा। अन्यथा कठिनाई यह होगी कि बहस अत्यंत सामान्य स्वरूप की होगी। खंड 2 के मामले में बहस बहुत ही सामान्य स्वरूप की थी क्योंकि हमने अलग-अलग मदों अथवा समूहों पर विचार नहीं किया था।

उपाध्यक्ष महोदय : मैं सहमत हूँ मैं उसी क्रम में आगे बढूँगा जिस क्रम में उन्हें आदेश पत्र में अंकित किया गया है।

डॉ. अम्बेडकर : मेरा संशोधन दरअसल दो भागों में है। मेरे संशोधन की मद सं. 1 मात्र एक शाब्दिक परिवर्तन है। मुझे यह बताया गया है कि मौजूदा खंड में प्रयुक्त ”जब तक कोई बात विषय अथवा सन्दर्भ से प्रतिकूल न हो“ शब्द उस भाषा के अनुरूप नहीं है जिसका प्रयोग हम संविधान पारित किए जाने के बाद करते आ रहे हैं। संविधान में “जब तक संदर्भ से अन्यथा अपेक्षित न हो” पदावली प्रयुक्त की