हिंदू कोड-जारी - Page 450

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गई है और इस विधेयक की भाषा को संविधान की भाषा के अनुरूप बनाने के उद्देश्य से मैं यह संशोधन कर रहा हूँ और केवल शब्दों में बदलाव किया गया है।

जहां तक अन्य संशोधनों का संबंध है, वे आवश्यक हैं क्योंकि अब यह प्रस्ताव किया गया है कि विवाह और विवाह-विच्छेद कानून उन व्यक्तियों पर भी लागू होने चाहिए जो मरुमक्कट्टयम एवं आलियासंतान कानून द्वारा शासित होते हैं। चूँकि परवर्ती धाराएं विषय के उसी पहलू से संबंधित हैं इसलिए परिभाषा खंड में विस्तार करना जरूरी है, ताकि उस विषय से संबंधित जरूरी परिभाषाएं उसमें शामिल की जा सकें और परिभाषा खंड को पूरा किया जा सके।

उपाध्यक्ष महोदय : प्रस्तावित संशोधन :

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Col1 Col2 Col3

खंड 3 में -

( i ) ”जब तक कोई बात विषय अथवा संदर्भ से प्रतिकूल न हो“ शब्दों के स्थान पर “जब तक संदर्भ से अन्यथा अपेक्षित न हो” शब्द रखे जाएंगे;

( ii ) मौजूदा मद ( i ), ( ii ), ( iii ) तथा ( iv ) का पुनः क्रमांक्रम मद ( ii ), ( iii ), ( iv ) तथा ( v ) किया जाएगा तथा निम्नलिखित को मद ( i ) के रूप में अंतः स्थापित किया जाएगा, अर्थात् :-

”(1)“ आलियासंतान कानून“ से उन व्यक्तियों पर लागू कानूनी प्रणाली अभिप्रेत है, जो, यदि यह कोड पारित नहीं किया गया होता, तो वे मद्रास आलियासंतान अधिनियम, 1949 (1949 का मद्रास अधिनियम IX ) द्वारा शासित होते;“

( iii ) पुनः क्रमांकन की गई मद ( iii ) में “धारा 44 तथा 49 को छोड़कर“ शब्दों का लोप किया जाएगा“;

( iv ) पुनः क्रमांकन की गई मद ( v ) के स्पष्टीकरण में “यह खंड ’’ के स्थान पर ”खंड ( iv ) और ( v )” शब्द रखे जाएंगे”;

( v ) मौजूदा मद ( v ), ( vi ), ( vii ) और ( viii ) का पुनः संख्यांकन मद सं. ( viii ), ( ix ), ( x ) और ( xi ) किया जाएगा और निम्नलिखित को मद ( vi ) और ( vii ) के रूप में अंतःस्थापित किया जाएगा अर्थात् :

”( vi ) “मरूमक्कट्टयम कानून“ से निम्नलिखित व्यक्तियों पर लागू कानूनी प्रणाली अभिप्रेत है-

(क) जो मद्रास मरूमक्कट्टयम अधिनियम, 1932, मद्रास अधिनियम (मद्रास अधिनियम, 1933 का XXII ), ट्रावनकोर नायर अधिनियम, 1100 का II, नंजिनदाद